Get App

दशक के अंत तक दोगुनी हो जाएंगी भारत की ऊर्जा जरूरतें, 2047 तक 40 लाख करोड़ डॉलर की होगी अर्थव्यवस्था: मुकेश अंबानी

इस वक्त भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एनर्जी कंज्यूमर है। मुकेश अंबानी पेट्रोलियम की प्रधानता वाले अपने रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप को स्वच्छ ऊर्जा की ओर मोड़ रहे हैं। अंबानी ने पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी (PDEU) के दीक्षांत समारोह में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2047 तक मौजूदा 3.5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 40 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की हो जाएगी

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Dec 02, 2023 पर 9:35 PM
दशक के अंत तक दोगुनी हो जाएंगी भारत की ऊर्जा जरूरतें, 2047 तक 40 लाख करोड़ डॉलर की होगी अर्थव्यवस्था: मुकेश अंबानी
मुकेश अंबानी ने कहा है कि अगले 25 वर्षों में भारत अभूतपूर्व आर्थिक वृद्धि का गवाह बनेगा।

भारत की आर्थिक वृद्धि में अभूतपूर्व तेजी के साथ देश की ऊर्जा जरूरतें (Energy Needs) मौजूदा दशक के अंत तक दोगुनी हो जाएंगी। यह बात रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने कही है। इस वक्त भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एनर्जी कंज्यूमर है। अंबानी ने पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी (PDEU) के दीक्षांत समारोह में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2047 तक मौजूदा 3.5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 40 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की हो जाएगी। उन्होंने कहा, 'इस वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए देश को भारी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होगी– क्लीन, ग्रीन एनर्जी जो मानव प्रगति के लिए प्रकृति का गला नहीं घोंटेगी।'

आगे कहा कि वास्तव में इस दशक के अंत तक भारत की ऊर्जा जरूरत दोगुनी हो जाएगी। मुकेश अंबानी पेट्रोलियम की प्रधानता वाले अपने रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप को स्वच्छ ऊर्जा की ओर मोड़ रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने और नए एनर्जी इकोसिस्टम के लिए गीगा फैक्ट्रीज बनाने में अरबों डॉलर का निवेश कर रही है।

ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने की राह में 3 बड़े सवाल

उन्होंने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अगले 25 वर्षों में भारत अभूतपूर्व आर्थिक वृद्धि का गवाह बनेगा और क्लीन, ग्रीन और टिकाऊ भविष्य के सपने को वास्तविकता में बदलना एक कठिन लेकिन महत्वपूर्ण काम है। अंबानी ने कहा, 'भारत अपने ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक मजबूत एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए कोशिश कर रहा है। ऐसे में उसे तीन महत्वपूर्ण सवालों का सामना करना पड़ेगा: पहला, यह कैसे सुनिश्चित किया जाए कि भारत में हर नागरिक और हर आर्थिक गतिविधि के लिए पर्याप्त, सबसे किफायती ऊर्जा हो? दूसरा, एनर्जी को कैसे तेजी से जीवाश्म ईंधन (कोयला) बेस्ड एनर्जी से क्लीन और ग्रीन एनर्जी में बदला जाए? तीसरा, देश कैसे एक अस्थिर बाहरी वातावरण से अपनी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की बढ़ती जरूरतों को जोखिम से मुक्त रख सकता है?'

सब समाचार

+ और भी पढ़ें