ISRO: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation - ISRO) रविवार को फिर से इतिहास रच दिया। ISRO ने ब्रिटेन के नेटवर्क एक्सेस एसोसिएटेड लिमिटेड (वनवेब) के 36 उपग्रहों (Satellites) को ले जाने वाले अपने लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM-III) रॉकेट लॉन्च कर दिया। ये रॉकेट यूके स्थित नेटवर्क एक्सेस एसोसिएटेड लिमिटेड (वनवेब) के 36 उपग्रहों (सैटेलाइट) को अंतरिक्ष में ले गया। भेजे गए सभी सैटेलाइट का कुल वजन 5805 किलोग्राम है। इस मिशन को LVM3-M3/वनवेब इंडिया-2 नाम दिया गया है। यह लॉन्चिंग सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट से सुबह 9.00 बजे की गई। यह दूसरे लॉन्चपैड से उड़ान भरी। यह लॉन्च पैड चंद्रयान-2 मिशन समेत अब तक पांच सफल लॉन्चिंग कर चुका है।
LVM3 से चंद्रयान-2 मिशन सहित लगातार पांच सफल मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं। यह इसकी छठी उड़ान है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन की नेटवर्क एक्सेस एसोसिएट्स लिमिटेड (वनवेब ग्रुप कंपनी) ने पृथ्वी की निचली कक्षा में 72 सैटेलाइट्स प्रक्षेपित करने के लिए करार किया गया है।
अमेरिका, जापान समेत इन कंपनियों की हिस्सेदारी
यह करार इसरो की कमर्शियल यूनिट न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के साथ किया गया है। इसी करार के तहत ये 36 उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए गए हैं। 6 Gen1 सैटेलाइट को पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में स्थापित किया गया है। वनवेब के लिए ISRO की कमर्शियल यूनिट न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) का ये दूसरा मिशन होगा। नेटवर्क एक्सिस एसोसिएटेड लिमिटेड यानी वनवेब (OneWeb) UK की संचार कंपनी है। इसमें ब्रिटिश सरकार, भारत की भारती इंटरप्राइजेज, फ्रांस की यूटेलसैट, जापान का सॉफ्टबैंक, अमेरिका के ह्यूज्स नेटवर्क्स और दक्षिण कोरियाई डिफेंस कंपनी हनव्हा की हिस्सेदारी है। ये सैटेलाइट आधारित सर्विस मुहैया कराने वाली संचार कंपनी है। इसका हेड ऑफिस लंदन में है।
हर जगह मिलेगी ब्रॉडबैंड इंटरनेट सर्विस
वनवेब के 36 सेटेलाइट्स फ्लोरिडा से 16 फरवरी को ही भारत आ गए थे। वनवेब इंडिया-2 स्पेस में 600 से ज्यादा लोअर अर्थ ऑर्बिट सेटेलाइट्स के कान्स्टलेशन को पूरा कर लेगी। इससे दुनिया के हर कोने में स्पेस आधारित ब्रॉडबैंड इंटरनेट सर्विस मुहैया कराने की योजना में मदद मिलेगी।
पृथ्वी की सबसे निचली कक्षा होती है लो अर्थ ऑर्बिट
लो अर्थ ऑर्बिट पृथ्वी की सबसे निचली कक्षा होती है। इसकी ऊंचाई पृथ्वी के चारों ओर 1600 किमी से 2000 किमी के बीच है। इस ऑर्बिट में किसी ऑब्जेक्ट की गति 27,000 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। यही वजह है कि 'लो अर्थ ऑर्बिट' में मौजूद सैटेलाइट तेजी से मूव करता है। इसे टारगेट करना आसान नहीं होता है।