Joshimath Sinking: जोशीमठ के लोगों को सता रही भविष्य की चिंता, आज रहने के लिए सुरक्षित नहीं अपने ही घर

Joshimath Sinking: उत्तराखंड सरकार की तरफ से आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जोशीमठ के सभी नौ नगरपालिका वार्डों को 'आपदा प्रभावित' और 'रहने के लिए असुरक्षित' घोषित करने के बाद, निवासियों को राहत कैंपों में शिफ्ट किया जा रहा है

अपडेटेड Jan 08, 2023 पर 10:18 PM
Joshimath Sinking: जोशीमठ के लोगों को सता रही भविष्य की चिंता

Joshimath Sinking: जमीन धंसने (Land Subsidence) के कारण दरारें चौड़ी होने के साथ, चमोली (Chamoli) जिले के जोशीमठ (Joshimath) शहर के अलग-अलग वार्डों में लोगों ने अपने घरों को खाली करना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन ने उनके घरों को "रहने के लिए असुरक्षित" घोषित करते हुए छुट्टी का नोटिस जारी किया था। उत्तराखंड सरकार की तरफ से आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जोशीमठ के सभी नौ नगरपालिका वार्डों को 'आपदा प्रभावित' और 'रहने के लिए असुरक्षित' घोषित करने के बाद, निवासियों को राहत कैंपों में शिफ्ट किया जा रहा है।

जोशीमठ में घरों का सर्वे करने वाली एक विशेषज्ञ टीम की सिफारिशों को मानकर ही ये फैसला लिया गया है। इस टीम ने राज्य प्रशासन को इस संबंध में सिफारिश की। जिला अधिकारियों के अनुसार, जोशीमठ शहर के 3,800 घरों में से 600 से ज्यादा घरों में दरारें आ गई हैं।

Hindustan Times के मुताबिक, जोशीमठ के नौ वार्डों में से एक मनोहर बाग के रहने वाले सूरज कापरुवान ने कहा, "हम यहां सालों से रह रहे हैं। हमारी रोजी-रोटी इसी कस्बे पर निर्भर है। शुरू में, हमने सोचा कि ये महीन सी दरारें कुछ भी नहीं हैं, लेकिन अब ये बहुत ही तेजी से बढ़ रही हैं।" सूरज कहीं दूसरी जगह शिफ्ट होने के लिए अपना सामान बांध रहे थे।


उन्होंने कहा, “मैंने अपने बच्चों और परिवार को दो दिन पहले सुरक्षित जगहों पर भेज दिया था। मुझे नहीं पता कि अब इस घर का क्या होगा।"

मनोहर बाग के कई घरों में, प्रशासन ने रविवार को लाल रंग से एक बड़ा सा "X" का निशान बना दिया है। इस निशान का मतलब है कि ये घर रहने के लिए असुरक्षित है।

मनोहर बाग की रहने वाली 60 साल की उषा ने कहा, “दरारें चौड़ी होने लगी हैं। हम सालों से अपनी मेहनत की कमाई से बने घर को खाली करने के लिए मजबूर हैं।”

ज्योतिर्मठ परिसर में स्थित ज्योतेश्वर महादेव मंदिर में आई दरारों को देखकर उन्होंने कहा, “हम अपनी पहचान खोने की कगार पर हैं। अगर भगवान उस ढांचे को नहीं बचा सकता, जो उसका है, तो आप सोच सकते हैं कि हमारा क्या होगा।"

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मनोहर बाग की ही रहने वाली एक और निवासी और जोशीमठ के एक प्राइवेट स्कूल में टीचर रजनी ने कहा, “हम अनिश्चित भविष्य की ओर देख रहे हैं। जिस स्कूल में मैं काम करती हूं, वो भी गायब हो सकता है।

जिला प्रशासन की तरफ से उनके घर को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद, उन्होंने कहा, “हम कल अपना घर छोड़ देंगे, क्योंकि अब रहना सुरक्षित नहीं है। मुझे अपनी बेटी और बेटे की सुरक्षा की चिंता है। हालांकि, सरकार का कहना है कि हमें होटल और उनकी तरफ से उपलब्ध कराए गए दूसरे घरों में शिफ्ट होना चाहिए, लेकिन अगर उनमें भी दरारें आ गईं, तो क्या होगा?"

चमोली जिले के जिला मजिस्ट्रेट (DM) हिमांशु खुराना ने कहा, "अब तक 60 परिवार सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं और ज्यादा लोग भी शिफ्ट हो रहे हैं। जोशीमठ की नगरपालिका सीमा के भीतर गांधीनगर में दो जोन, सिंहदार में एक जोन, मनोहर वार्ड में दो और सुनील वार्ड में एक क्षेत्र को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है और नो एंट्री जोन बनाया गया है।

वहीं केंद्र सरकार की एजेंसियां और विशेषज्ञ जोशीमठ में स्थिति से निपटने के लिए शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म योजनाएं तैयार करने में उत्तराखंड सरकार की मदद कर रहे हैं। अधिकारियों ने रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद यह जानकारी दी।

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