Joshimath Sinking: 'PM मोदी ने जोशीमठ को बचाने का दिया आश्वासन', PMO में हाई लेवल मीटिंग, शंकराचार्य मठ में भी आई दरारें

Joshimath Sinking: अस्थायी राहत शिविरों (relief camps) में जाने वाले 11 और परिवारों के साथ खाली कराए गए घरों की कुल संख्या 65 है। चमोली जिला प्रशासन ने शनिवार को कहा कि हिमालयी शहर के नौ वार्डों में अब तक 603 इमारतों में दरारें आ चुकी हैं

अपडेटेड Jan 08, 2023 पर 2:23 PM
Joshimath Sinking: चमोली जिला प्रशासन ने शनिवार को कहा कि हिमालयी शहर के नौ वार्डों में अब तक 603 इमारतों में दरारें आ चुकी हैं

Joshimath Sinking: उत्तराखंड (Uttarakhand) के जोशीमठ (Joshimath) में 11 और परिवारों को शनिवार रात सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया, क्योंकि डूबते शहर में लगातार घरों में खतरनाक दरारें आ रही हैं। शनिवार को अस्थायी राहत शिविरों (relief camps) में जाने वाले 11 और परिवारों के साथ खाली कराए गए घरों की कुल संख्या 65 है। चमोली जिला प्रशासन ने शनिवार को कहा कि हिमालयी शहर के नौ वार्डों में अब तक 603 इमारतों में दरारें आ चुकी हैं।

Joshimath Sinking Latest Updates:

- उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धंसने और कई स्थानों पर घरों में दरारें पड़ने की घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) रविवार दोपहर को इस संकट पर उच्चस्तरीय बैठक करेगा। सरकारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा कैबिनेट सचिव, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्यों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।


- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने फोन पर विस्तृत जानकारी ली और पूछा कि कितने लोग इससे प्रभावित हुए हैं, कितना नुकसान हुआ, लोगों के विस्थापन के लिए क्या किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने जोशीमठ को बचाने के लिए हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।

- इस बैठक में जोशीमठ जिला प्रशासन और उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हिस्सा लेंगे।

- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जमीनी स्तर पर स्थिति का जायजा लेने के लिए कल जोशीमठ का दौरा किया था। इससे एक दिन पहले उन्होंने करीब 600 प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का निर्देश दिया था। धामी ने कहा था कि जोशीमठ सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है और इसे बचाने के सभी प्रयास किए जाएंगे।

- शंकराचार्य मठ में भी दरारें पड़ गई हैं। ANI के मुताबिक, ज्योतिर्मठ इलाके में हिंदू मठ में पिछले 15 दिनों में कई दरारें आ गई हैं।

- चीन सीमा की ओर जाने वाली मेन सड़क में आ गईं दरारें- ANI के अनुसार शनिवार को जोशीमठ में भूस्खलन के कारण चीन सीमा को जोड़ने वाले चमोली जिले में अहम जोशीमठ-मलारी बॉर्डर रोड में कई जगहों पर दरारें आ गई हैं।

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- चमोली के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनके जोशी ने कहा कि जिन घरों में दरारें आ गई हैं, उनकी संख्या बढ़कर 603 हो गई है। इसलिए घरों को खाली कराया गया है। जिन परिवारों को अब तक निकाला गया है, उनकी संख्या 65 है और दूसरे 11 शनिवार को उन घरों से अस्थायी राहत शिविरों में जा रहे हैं, जिनमें दरारें आ गई थीं।

- 11 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय ने शनिवार को कहा कि आपदा मद में जिलाधिकारी चमोली को 11 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई गई है।

- जोशीमठ संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिए SC में याचिका दायर- एक याचिका दायर करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तराखंड के लोगों को तत्काल वित्तीय सहायता और मुआवजा देने की मांग की। याचिका में इस चुनौतीपूर्ण समय में जोशीमठ के निवासियों को सक्रिय रूप से समर्थन देने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को निर्देश देने की भी मांग की गई है।

- निवासियों ने NTPC प्रोजेक्ट को दोषी ठहराया- जोशीमठ के लोगों ने अपनी परेशानी के लिए NTPC की तपोवन-विष्णुगढ़ जल विद्युत परियोजना को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि खतरनाक स्थिति के बारे में चेतावनी देने वाली उत्तराखंड सरकार की उदासीनता के लिए उसके खिलाफ कड़ा आक्रोश है।

जोशीमठ बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों और इंटरनेशलन स्कीइंग स्पॉट औली के लिए प्रवेश द्वार है और इसके सामने अब एक बहुत बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है।

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