Kedarnath Yatra: मौसम साफ होते ही केदारनाथ यात्रा फिर से शुरू, लेकिन सतर्कता बरत रही उत्तराखंड सरकार

Kedarnath Yatra: सोनप्रयाग से केदारनाथ के लिए यात्री भेजे गए। सोनप्रयाग सुबह 11 बजे तक 2000 यात्री धाम रवाना किए गए। आज मौसम साफ है और धाम में भी धूप खिली हुई है। मौसम विभाग ने आज से मौसम बदलने के आसार जताए हैं। अगले दो दिन मौसम साफ रह सकता है। केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल को खुले थे और अब तक वहां एक लाख 22 हजार 996 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं

अपडेटेड May 04, 2023 पर 3:22 PM
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Kedarnath Yatra: 3 मई को भारी बर्फबारी के चलते कुबेर ग्लेशियर के पास भैरव गदेरे में हिमखंड आने से मार्ग बाधित हो गया था

Kedarnath Yatra: उत्तराखंड में स्थित प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के लिए आज यानी गुरुवार (3 मई) से एक बार फिर यात्रा सुचारु रूप से शुरु हो गई है। गुरुवार को सीमित संख्या में ही यात्रियों को धाम के लिए रवाना किया गया है। केदारनाथ रूट में जगह-जगह 20,657 हजार यात्री रोके गए हैं। आज मौसम साफ है और धाम में भी धूप खिली हुई है। NDRF के अनुसार बर्फ हटाकर केदारनाथ रूट को तीर्थयात्रियों के लिए खोल दिया गया है। सोनप्रयाग से गुरुवार सुबह 11 बजे तक 2,000 यात्री धाम के लिए रवाना किए गए। मौसम विभाग ने आज से मौसम बदलने के आसार जताए हैं। अगले दो दिन मौसम साफ रह सकता है।

बता दें कि केदारनाथ में बीते कई दिनो से हो रही बर्फबारी के बाद करीब छह इंच बर्फ जमा है। मौसम विभाग के मुताबिक, यहां तापमान माइनस 2 डिग्री तक पहुंच गया है। यह पहला मौका है, जब भगवान केदार का कपाट खुलने के बाद से लगातार बर्फबारी हो रही है। मौसम के बिगड़े मिजाज से यात्रा प्रभावित हो रही है और पुनर्निर्माण कार्य भी ठप पड़े हैं।

सतर्कता बरत रही उत्तराखंड सरकार


साल 2013 की आपदा से सबक लेते हुए उत्तराखंड सरकार उच्च गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र में लगातार जारी प्रतिकूल मौसमी दशाओं के बीच चारधाम, विशेषकर केदारनाथ यात्रा को लेकर अत्यधिक सतर्कता बरत रही है। भारी बर्फबारी और बारिश के कारण बुधवार को न केवल केदारनाथ यात्रा स्थगित रखी गई बल्कि धाम की ओर आ रहे श्रद्धालुओं को ऋषिकेश, श्रीनगर, फाटा, गौरीकुंड सहित विभिन्न पड़ावों में रोक लिया गया।

उत्तराखंड के DGP अशोक कुमार ने बताया कि खराब मौसम के कारण यात्रा को रोकने का निर्णय लिया गया था जिससे यात्रियों को किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति से बचाया जा सका। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की संभावित विपत्ति से निपटने के लिए पूरी तैयारी थी। हालांकि इस दौरान कोई भी बड़ा नुकसान केदारनाथ में नहीं हुआ जिसकी लगातार आशंका बनी हुई थी।

बुधवार को ही केदारनाथ घाटी में कुबेर हिमनद का एक बड़ा हिस्सा टूटकर पैदल मार्ग पर आ गिरा था जिससे पूरा मार्ग बर्फ से ढक गया। इसके अलावा लिंचोली से केदारनाथ आ रहे नेपाली मूल के चार पोर्टर भी हिमनद के टूटने से बर्फ में फंस गए जिन्हें राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) की टीम ने अत्यंत विषम परिस्थितियों में मौके पर पहुंच कर सुरक्षित बाहर निकाला।

पुलिस ने की खास तैयारी

DGP ने एसडीआरएफ टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह हर जगह चौकस रहकर मुस्तैदी से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए एसडीआरएफ ने 22 संवेदनशील स्थानों पर अपनी चौकियां स्थापित की हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस और एसडीआरएफ के जवान श्रद्धालुओं के अस्वस्थ और चोटिल होने पर उन्हें प्राथमिक इलाज देकर तत्काल अस्पताल पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक ऊंचाई पर श्रद्धालुओं को जरूरत पड़ने पर आक्सीजन भी उपलब्ध कराई जा रही है।

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खराब मौसम के मद्देनजर यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लेने कुमार स्वयं मंगलवार को केदारनाथ गए थे। उन्होंने बताया कि वहां उन्होंने फाटा से धाम के रास्ते में सोनप्रयाग एवं गौरीकुंड में यात्रा पर आए श्रद्धालुओं से बातचीत की और उनकी यात्रा के अनुभव जाने। इस दौरान, उन्होंने केदारनाथ धाम में पुलिस अधिकारियों के साथ यात्रा व्यवस्था की समीक्षा की। केदारनाथ धाम के कपाट 25 अप्रैल को खुले थे और अब तक वहां एक लाख 22 हजार 996 श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं।

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