Mahakumbh 2025: प्रयागराज में यमुना, गंगा और सरस्वती नदी के संगम की पौराणिक कथाओं से प्रेरित होकर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अनोखा कदम उठाया है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग ने गंगा नदी की तीन अलग-अलग धाराओं को एकजुट किया है, ताकि संगम स्थल पर पानी का पर्याप्त बहाव सुनिश्चित किया जा सके। इसका मकसद महाकुंभ-2025 में लाखों श्रद्धालुओं के लिए स्नान के अनुभव को बेहतर बनाना है। प्रयागराज में इस महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी के बीच किया जाएगा।
महाकुंभ के नोडल ऑफिसर विजय आनंद ने बताया, 'यह पहल राजा भागीरथ की पौराणिक कथा की झलक पेश करती है, जिन्होंने अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए प्रायश्चित के जरिये इस पावन नदी को धरती पर लाया था।' उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के इस प्रोजेक्ट के जरिये संगम में गंगा नदी का पर्याप्त जल बहता रहेगा, जहां 4 करोड़ से भी ज्यादा श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे।
दरअसल, गंगा ने अपनी दिशा बदल ली है और शास्त्री ब्रिज और संगम नोज के बीच तीन धाराओं में बंट गई है। ऐसे में महाकुंभ के लिए इंतजाम करना जटिल हो गया है। धाराओं के बंटवारे की वजह से नदी के पास मौजूद खाली जगह सीमित हो गई है और श्रद्धालुओं के लिए परेशानी हो गई थी। सिंचाई विभाग के हस्तक्षेप के बाद नदी की मूल धारा एकीकृत हो गई है और स्नान के लिए मौजूद जगह का भी विस्तार हो गया है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।
आनंद ने बताया, 'तीन धाराओं को जोड़ना चुनौतीपूर्ण, लेकिन जरूरी काम था। इससे यह सुनिश्चत होता है कि श्रद्धालु बिना किसी दिक्कत के पवित्र जल से स्नान कर सकेंगे।' प्रोजेक्ट के तकनीकी सलाहकार मनीष श्रीवास्तव ने बताया, 'अलग-अलग धाराओं को जोड़ने के साथ हमने स्नान के लिए अतिरिक्त 22 हेक्टेयर की जगह तैयार की है।'
गंगा की शुद्धता को बरकरार रखने के लिए यूपी जल निगम (शहरी) ने सलोरी में 55 करोड़ की लागत से जियोट्यूब टेक्नोलॉजी आधारित ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया है। यह प्लांट शहर के 22 नालों से गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर यह सुनिश्चित करेगा कि बिना ट्रीटमेंट वाला कोई पानी गंगा में प्रवेश नहीं करे, जैसा कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है। जल निगम (शहरी) के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर सौरभ कुमार ने बताया, ' इस प्लांट का फिलहाल ट्रायल रन चल रहा है और 1 जनवरी से यह पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगा।'