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Maha Kumbh 2025: 144 साल पहले भी कुंभ मेले से खूब पैसे कमाती थी सरकार, 20 हजार लगाकर बटोरे थे 50,000

Mahakumbh 2025: इस बार कुंभ का आयोजन इसलिए स्पेशल है क्योंकि इसे पूर्ण कुंभ कहा जा रहा है जो हर 144 साल में आयोजित होता है। इससे पहले 1882 में प्रयाग में पूर्ण कुंभ का आयोजन हुआ था। कुंभ की आर्थिक प्रासंगिकता की बात करें तो उस वक्त भी अंग्रेजी सरकार ने कुंभ पर करीब 20 हजार रुपये खर्च किए थे

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 27, 2024 पर 4:29 PM
Maha Kumbh 2025: 144 साल पहले भी कुंभ मेले से खूब पैसे कमाती थी सरकार, 20 हजार लगाकर बटोरे थे 50,000
Mahakumbh 2025: 144 साल पहले भी कुंभ मेले से खूब पैसे कमाती थी सरकार, 20 हजार लगाकर बटोरे थे 50,000

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार कुंभ की आर्थिक उपयोगिता पर खूब जोर देती रही है। यूपी की बीजेपी सरकार का तर्क रहा है कि इस आयोजन से आर्थिक गतिविधियों को बल मिलता है और प्रदेश इकोनॉमिक बूस्ट मिलता है। यूपी सरकार को उम्मीद की है कि इस बार कुंभ में दो लाख करोड़ की आर्थिक गतिविधियां हो सकती हैं।

इस बार कुंभ का आयोजन इसलिए स्पेशल है क्योंकि इसे पूर्ण कुंभ कहा जा रहा है जो हर 144 साल में आयोजित होता है। इससे पहले 1882 में प्रयाग में पूर्ण कुंभ का आयोजन हुआ था। कुंभ की आर्थिक प्रासंगिकता की बात करें तो उस वक्त भी अंग्रेजी सरकार ने कुंभ पर करीब 20 हजार रुपये खर्च किए थे। सरकार को कुंभ के आयोजन से करीब 50 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था जिसे बाद में शहर के विकासकार्यों में लगाया गया था।

ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स में दर्ज है खर्च का ब्योरा

ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स में यह बात दर्ज है कि 1882 के कुंभ के आयोजन के दौरान सरकार द्वारा कितना खर्च किया गया और कितना राजस्व प्राप्त हुआ। उस वक्त नॉर्थ वेस्ट प्रोविंस के सेक्रेटरी AR रीड ने कुंभ के आयोजन पर एक रिपोर्ट तैयार की थी जिसमें इन सारी बातों का जिक्र है।

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