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Share Market Crash: IT Sector के दबाव पर Sensex डे-हाई से 700 प्वाइंट्स नीचे, 4 वजहों से Nifty भी धड़ाम

Share Market Crash: नीतिगत स्तरों पर पॉजिटिव्स के बावजूद मार्केट संभल नहीं पाया। आरबीआई के नीतिगत ऐलान के बाद मार्केट में उठा-पटक दिखी और फिर सेंसेक्स (Sensex) इंट्रा-डे हाई से 700 प्वाइंट्स से अधिक फिसल गया तो निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 23,300 के नीचे आ गया। जानिए मार्केट में गिरावट की चार मुख्य वजहें

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Jun 05, 2026 पर 4:08 PM
Share Market Crash: IT Sector के दबाव पर Sensex डे-हाई से 700 प्वाइंट्स नीचे, 4 वजहों से Nifty भी धड़ाम
एक्सपर्ट्स के मुताबिक बाजार में सभी पॉजिटिव्स तेजी में शामिल हो चुके हैं।

Share Market Crash: एशियाई बाजारों से निगेटिव माहौल के बावजूद शुरुआती कारोबार में आज घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज बढ़त के साथ खुले थे। RBI ने रेपो रेट को उम्मीद के मुताबिक स्थिर बनाए रखा लेकिन फिर भी सेंसेक्स-निफ्टी हल्की उठा-पटक के बाद फिसल गए। इंट्रा-डे हाई से सेंसेक्स आज 700 प्वाइंट्स से अधिक फिसल गया तो निफ्टी भी 23,300 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी दबाव दिखा लेकिन स्मॉलकैप स्पेस में थोड़ी रौनक लौट आई। निफ्टी मिडकैप 100 करीब आधे फीसदी की बढ़त गंवाते हुए करीब आधे फीसदी की गिरावट में आ गया। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी आधे फीसदी की शुरुआती बढ़त गंवाते हुए पहले तो करीब आधे फीसदी फिसल गया लेकिन फिर रिकवर होकर यह फ्लैट ग्रीन बंद हुआ।

आज सेंसेक्स (Sensex) 116.67 प्वाइंट्स यानी 0.16% की गिरावट के साथ 74,243.34 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 49.85 प्वाइंट्स यानी 0.21% की फिसलन के साथ 23,366.70 पर बंद हुआ है।  शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 357.56 प्वाइंट्स उछलकर 74,717.57 तक पहुंचा था जिससे यह 728.82 प्वाइंट्स टूटकर 73,988.75 तक आ गया था तो दूसरी तरफ निफ्टी 133.90 प्वाइंट्स उछलकर 23,516.35 तक पहुंचा था जिससे यह 233.70 प्वाइंट्स फिसलकर 23,282.65 तक आ गया था।

Why Market Fall: ये है वजहें

RBI की चिंताएं

आरबीआई ने रेपो रेट को स्थिर रखा है लेकिन लेकिन वित्त वर्ष 2027 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 6.60% कर दिया दिया तो खुदरा महंगाई के अनुमान को बढ़ाकर 5.1% किया तो मार्केट को झटका लगा। आरबीआई गवर्नर ने यह भी आशंका जताई कि कमजोर ग्लोबल डिमांड और लॉजिस्टिक्स की ऊंची लागत का माल के निर्यात पर बुरा असर दिख सकता है।

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