Monsoon Updates: मानसून ने केरल में दी दस्तक, एक हफ्ते की हुई देरी, IMD ने बताया आगे कैसा रहेगा मौसम

Monsoon Updates: दक्षिण पश्चिम मानसून आम तौर पर केरल में एक जून तक पहुंच जाता है। ये एक जून से करीब सात दिन पहले या बाद में दस्तक देता है। मई में IMD ने कहा था कि मानसून केरल में चार जून के आसपास पहुंच सकता है। प्राइवेट वेदर फोरकास्ट एजेंसी ‘स्काईमेट’ ने केरल में सात जून को मानसून के आने का अनुमान जताया था और कहा था कि मानसून सात जून से तीन दिन आगे या पीछे आ सकता है

अपडेटेड Jun 08, 2023 पर 4:21 PM
Monsoon Updates: एक हफ्ते देरी के बाद मानसून ने भारत में दी दस्तक

दक्षिण पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) ने अपने सामान्य समय से एक हफ्ते की देरी के बाद बृहस्पतिवार को भारत में दस्तक दे दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून के केरल (Kerala) आने की घोषणा की है। मौसम विज्ञानियों ने इससे पहले कहा था कि चक्रवात ‘बिपरजोय’ (Cyclone Biparjoy) मानसून को प्रभावित कर रहा है और केरल में इसकी शुरुआत ‘मामूली’ होगी। IMD ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा, "दक्षिण पश्चिम मानसून आज आठ जून को केरल पहुंच गया।"

बयान में कहा गया है, ‘‘मानसून दक्षिण अरब सागर के बाकी बचे हिस्सों और मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों और समूचे लक्षद्वीप क्षेत्र, केरल के ज्यादा इलाकों, दक्षिण तमिलनाडु के ज्यादातर हिस्सों, कोमोरिन क्षेत्र के बाकी हिस्सों, मन्नार की खाड़ी और दक्षिण पश्चिम, मध्य और उत्तर पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों की ओर बढ़ रहा है।’’

दक्षिण पश्चिम मानसून आम तौर पर केरल में एक जून तक पहुंच जाता है और आम तौर पर एक जून से करीब सात दिन पहले या बाद में यह पहुंचता है। मई में IMD ने कहा था कि मानसून केरल में चार जून के आसपास पहुंच सकता है।


प्राइवेट मौसम पूर्वानुमान केंद्र ‘स्काईमेट’ ने केरल में सात जून को मानसून के आने का अनुमान जताया था और कहा था कि मानसून सात जून से तीन दिन आगे पीछे आ सकता है।

IMD  के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 150 सालों में केरल में मानसून की शुरुआत की तारीख अलग रही है, जो 1918 में समय से काफी पहले 11 मई को और 1972 में सबसे देरी से 18 जून को आया था।

दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछले साल 29 मई को, 2021 में तीन जून को, 2020 में एक जून, 2019 में आठ जून और 2018 में 29 मई को केरल पहुंचा था।

रिसर्च से पता चलता है कि केरल में मानसून के पहुंचने में देरी का मतलब यह नहीं है कि उत्तर पश्चिम भारत में मानसून की शुरुआत में देरी होगी।

हालांकि, केरल में मानसून के आगमन में देरी आम तौर पर दक्षिणी राज्यों और मुंबई में मानसून की शुरुआत में देरी से जुड़ी होती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि केरल में मानसून के पहुंचने में देरी भी इस मौसम के दौरान देश में कुल बारिश को प्रभावित नहीं करती।

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IMD ने पहले कहा था कि ‘एल नीनो’ की स्थिति विकसित होने के बावजूद दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में भारत में सामान्य बारिश होने की उम्मीद है।

उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य या उससे कम बारिश होने की उम्मीद है। पूर्व और उत्तर पूर्व, मध्य और दक्षिण प्रायद्वीप में इस दौरान औसत की 94 से 106 प्रतिशत सामान्य बारिश होने की उम्मीद है।

मानसून की अवधि के दौरान औसत के 90 प्रतिशत से कम बारिश को ‘बारिश में कमी’ माना जाता है, 90 फीसदी से 95 फीसदी के बीच बारिश को ‘सामान्य से कम वर्षा’, 105 फीसदी से 110 फीसदी के बीच होने वाली बारिश को ‘सामान्य से ज्यादा वर्षा’ और 100 फीसदी से ज्यादा होने वाली बारिश को ‘अत्यधिक वर्षा’ माना जाता है।

भारत के कृषि सेक्टर के लिए सामान्य बारिश बुहत जरूरी है। कुल कृषि क्षेत्र का 52% बारिश पर निर्भर है। यह देश भर में बिजली उत्पादन के अलावा पीने के पानी के लिए महत्वपूर्ण जलाशयों को फिर से भरने के लिए भी अहम है।

देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में बारिश पर निर्भर खेती का लगभग 40 प्रतिशत योगदान है, जो इसे भारत की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

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