आधार नंबर जारी करने वाली नोडल संस्था यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) ने नीलकंठ मिश्रा को अपना अंशकालिक अध्यक्ष नियुक्त किया है। वर्तमान में नीलकंठ मिश्रा एक्सिस बैंक लिमिटेड में मुख्य अर्थशास्त्री और ग्लोबल रिसर्च हेड हैं। एक्सिस बैंक से पहले, मिश्रा ने ज्यूरिख स्थित क्रेडिट सुइस में दो दशकों तक काम किया है। नीलकंठ मिश्रा मेटल और माइनिंग, इंडियन फार्मास्यूटिकल्स, ताइवान आईसी डिजाइन, सेमीकंडक्टर फाउंड्री और एशियन टेक स्ट्रैटजी रिसर्च में माहिर हैं। बता दें कि यूआईडीएआई बोर्ड में एक अध्यक्ष, दो अंशकालिक सदस्य और सीईओ होते हैं।
आधार को इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि के दिमाग की उपज माना जाता है। इसने भारतीयों के लिए विशिष्ट पहचान जारी करने में क्रांति ला दी है। आधार देश में जरूरतमंद नागरिकों के लिए बनाई गई तमाम सरकारी और निजी क्षेत्र की योजनाओं के लिए बहुत ही अहम हो गया है। हालांकि,सेफ्टी और डेटा सिक्योरिटी से संबंधित मुद्दों ने इस सिस्टम पर कई सवाल भी उठाए हैं। नीलकंठ मिश्रा टेक्नोलॉजी और इकोनॉमिक पॉलिसी दोनों के जानकार हैं। ऐसे में UIDAI के पार्ट-टाइम चेयरपर्सन के रूप में नीलकंठ मिश्रा की नियुक्त से इस एजेंसी को अपनी प्रक्रियाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
नीलकंठ मिश्रा को आर्थिक नीति और बाजार रणनीति पर अपने अलग नजरिए के लिए जाना जाता है। इसके पहले ये कई सरकारी समितियों के सलाहकार रहे हैं। ये 15वें वित्त आयोग की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य भी रहे हैं। सरकारी नीतियों पर उनके विचार समाचार पत्रों और ऑनलाइन प्रकाशनों में उनके नियमित लेखों के माध्यम से प्रकाशित होते रहते हैं।
नीलकंठ मिश्रा सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम्स के प्रबल समर्थक रहे हैं। उनका मानना है कि इस स्कीम से मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। आईआईटी-कानपुर से कंप्यूटर विज्ञान में गोल्ड मेडलिस्ट नीलकंठ मिश्रा का मानना है कि ग्लोबल इकोनॉमी की मंदी के बीच भारत की डिजिटल प्रगति उसके विकास को गति देने में एक अहम भूमिका निभाएगी। मिश्रा अक्सर व्यापार करने में आसानी को बढ़ाने वाले तकनीकी बदलावों के फायदे और नुकसान दोनों पर प्रकाश डालते रहते हैं।