लोकसभा में पेश हुआ इमिग्रेशन और फॉरनर्स बिल 2025, भारत में बिना वीजा-पासपोर्ट एंट्री पर मिलेगी कड़ी सजा

भारत सरकार द्वारा इमिग्रेशन और फॉरनर्स बिल 2025 लाने का मकसद देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाना है। इमिग्रेशन प्रोसेस पर सरकार पूरी तरह से नियंत्रण रखेगी और विदेशियों की तरफ से अब नियमों कानूनों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जा सकेगी

अपडेटेड Mar 11, 2025 पर 6:15 PM
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गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में इमिग्रेशन और फॉरनर्स बिल 2025 पेश किया।

India Immigration System :  गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में इमिग्रेशन और फॉरनर्स बिल 2025 पेश किया। इस कानून का मकसद भारत में आने-जाने और रहने से जुड़े नियमों को स्पष्ट और सख्त बनाना है। अगर राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई खतरा महसूस हुआ, तो सरकार किसी भी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश देने से मना कर सकती है।

लोकसभा में गृह राज्य मंत्री ने कहा, 'देश की उन्नति देश की प्रभुता और शांति भी सरकार की जिम्मेदारी है। ये बिल हम किसी को रोकने के लिए नहीं ला रहे हैं, ज्यादा से ज्यादा लोग यहां पर आए लेकिन हमारे देश का जो कानून है उसका पालन जरूर करें।

क्या है नए बिल में


इस नए बिल के मुताबिक, भारत में आने के लिए किसी भी विदेशी के पास 'वैध पासपोर्ट और वीज़ा' होना अनिवार्य होगा। अगर कोई शख्स बिना परमिट के भारत में घुसता है, अवैध रूप से ज्यादा समय तक ठहरता है या जाली दस्तावेज़ इस्तेमाल करता है, तो उसे सख्त सजा मिलेगी। जो भी विदेशी, भारत आएंगे, उन्हें अराइवल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके अलावा, नाम बदलने, एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने और संरक्षित इलाकों में घूमने पर भी पाबंदियां लगाई जाएंगी। यह नया कानून भारत की सुरक्षा और इमिग्रेशन प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

नियम तोड़े तो मिलेगी कड़ी सजा

नए कानून के तहत विदेशी नागरिकों को भारत में प्रवेश और रहने से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। अगर कोई नियम तोड़ा गया, तो उसे गंभीर सजा का सामना करना पड़ सकता है। बिना सही पासपोर्ट और दस्तावेजों के भारत में घुसने पर – 5 साल तक की जेल और ₹5 लाख तक का जुर्माना लग सकता है। जाली पासपोर्ट या वीज़ा का इस्तेमाल करने पर– 7 साल तक की कैद और 1 लाख से 10 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है । वीज़ा खत्म होने के बाद भी रुकने या प्रतिबंधित इलाकों में जाने पर, 3 साल तक की जेल और 3 लाख तक का जुर्माना लग सकता है।

मिले ये अधिकार

इमिग्रेशन अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे बिना वारंट के किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं। इसके अलावा, सरकार को यह हक होगा कि वह किसी भी व्यक्ति के भारत छोड़ने पर रोक लगा सके, अगर उसकी उपस्थिति किसी जांच एजेंसी के लिए जरूरी हो।

अभी तक भारत में इमिग्रेशन प्रणाली 1946 अधिनियम, विदेशियों के पंजीकरण अधिनियम 1939 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920 के तहत चल रही थी। भारत फिजिकल और ई-वीज़ा दोनों जारी करता है। जापान, दक्षिण कोरिया और यूएई (कुछ शर्तों के साथ) के नागरिकों को वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा मिलती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 के बीच 98.40 लाख विदेशी नागरिकों ने भारत की यात्रा की। इससे साफ है कि भारत दुनियाभर के पर्यटकों और यात्रियों के लिए एक अहम डेस्टिनेशन बना हुआ है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

इमिग्रेशन और फॉरनर्स बिल 2025 को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि इस कानून से कुछ गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इसे असंवैधानिक बताया। उनका कहना है कि यह कानून सरकार की विचारधारा से असहमत लोगों को भारत में प्रवेश से रोकने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने चिंता जताई कि यह कड़ा कानून भारत में आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं के लिए एक बड़ी बाधा बन सकता है।

पुराने कानून होंगे खत्म

अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो यह पुराने इमिग्रेशन और फॉरनर्स से जुड़े चार प्रमुख कानूनों को खत्म कर देगा

1. विदेशी अधिनियम, 1946

2. पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920

3. फॉरनर्स रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1939

4. इमिग्रेशन अधिनियम, 2000

सरकार का कहना है कि नया कानून भारत की सुरक्षा और इमिग्रेशन प्रणाली को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाएगा। लेकिन विपक्ष को डर है कि यह कानून सरकार के लिए एक सख्त नियंत्रण उपकरण बन सकता है।

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