Get App

प्रधानमंत्री मोदी संसद में अपने जवाब से 5 राज्यों में चुनावी बढ़त बनाने की कोशिश की है

प्रधानमंत्री में संसद में जवाब देते हुए मतदाताओं तक साफ संदेश पहुंचाने का प्रयास किया है, अब देखना है कि मतदाताओं पर इसका कितना असर होता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 10, 2022 पर 3:27 PM
प्रधानमंत्री मोदी संसद में अपने जवाब से 5 राज्यों में चुनावी बढ़त बनाने की कोशिश की है
अब प्रधानमंत्री की रैलियों की तरह संसद के दोनों सदनों से मतदाताओं को दिया गया संदेश कितना प्रभावी होता है, इसका परिणाम आना बाक़ी है

हर्ष वर्धन त्रिपाठी

राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी को पहले चरण के चुनाव से ठीक पहले बहुत बड़ा मुद्दा दे दिया है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बोलते हुए राहुल गांधी ने बहुत सी ऐसी बातें कहीं, जिस पर भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी कांग्रेस को घेर सकते थे, लेकिन राहुल गांधी की भारत राष्ट्र को राष्ट्रों का समूह बताने की कोशिश भारतीय जनता पार्टी के लिए मुंहमांगी मुराद जैसा रहा।

भारतीय जनता पार्टी और उससे पहले भारतीय जनसंघ की पूरी राजनीति राष्ट्र और राष्ट्रवाद के इर्द गिर्द ही घूमती रही है। राम और राष्ट्र भारतीय जनता पार्टी की राजनीति की धुरी रहे हैं और आज भी सबका साथ, सबका विकास फिर उसमें सबका प्रयास और अब सबका विश्वास जुड़ने के बावजूद इस सबकी बुनियाद राम और राष्ट्र ही रही है। भारतीय जनता पार्टी की इसी राजनीति को मीडिया सामान्य संदर्भों में हिन्दुत्व की राजनीति कहता है और कई बार इसमें मुसलमान विरोधी राजनीति भी कहा जाता है।

पश्चिमी प्रकाशनों में भारतीय जनता पार्टी को हिन्दू पार्टी के तौर पर ही चिन्हित किया जाता है। वैचारिक तौर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भारतीय जनता पार्टी को ऊर्जा मिलती है। भाजपा नेता के तौर पर प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे दोनों नेता- अटल बिहारी वाजपेयी और अभी नरेंद्र मोदी- संघ के प्रचारक रहे हैं। भारत माता की संकल्पना को लेकर ही संघ और भाजपा की पूरी सामाजिक और राजनीतिक यात्रा रही है। ऐसे में जब कांग्रेस नेता के तौर पर राहुल गांधी भारत राष्ट्र पर ही प्रश्न खड़ा करते हैं तो नरेंद्र मोदी को आसानी से मुद्दा मिल जाता है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें