इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (Indian Overseas Congress) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा (Sam Pitroda) ने गुरुवार को राम मंदिर (Ram Mandir) को लेकर दिए गए अपने पिछले बयान पर अब सफाई दी है। उन्होंने कहा कि धर्म का पालन किया जाना चाहिए, लेकिन इसे राजनीति में नहीं उलझाना चाहिए। सैम पित्रोदा ने सवाल उठाते हुए कहा था, 'क्या राम मंदिर असली मुद्दा है या बेरोजगारी और महंगाई?' अब पित्रोदा ने न्यूज एजेंसी PTI को दिए खास इंटरव्यू में दोहराया कि अगला लोकसभा चुनाव बताएगा कि हम किस तरह का राष्ट्र बनाना चाहते हैं।
उन्होंने सवाल किया कि क्या हम अपने संविधान में बताए एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं, जो सभी धर्मों का सम्मान करता है, जो हमारे संस्थानों की स्वायत्तता पर केंद्रित है, जो हमारे नागरिक समाजों को प्रभावी ढंग से काम करने की अनुमति देता है या आप एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं, जिसमें एक धर्म हावी हो?
पित्रोदा ने कहा कि जब मैं राम मंदिर या किसी और चीज के बारे में बात करता हूं, तो उनकी टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है। उन्होंने कहा कि अगले साल होने वाला लोकसभा चुनाव बीजेपी बनाम कांग्रेस का चुनाव नहीं है, बल्कि देश के भाग्य का फैसला करने का चुनाव है।
उन्होंने कहा कि अगला (लोकसभा) चुनाव भारत के भविष्य के बारे में है। ये इस बारे में है कि हम किस तरह का राष्ट्र बनाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, "मैं मूल रूप से संविधान को बचा रहा हूं। मैं कह रहा हूं कि धर्म एक बहुत ही व्यक्तिगत मामला है, इसे लोगों पर छोड़ दें। बेशक, लोगों को जश्न मनाना चाहिए जिस तरह वे मनाना चाहते हैं, लेकिन इसे राजनीति में न उलझाएं और यही हमारा संविधान कहता है। इसलिए मैं कुछ अलग नहीं कह रहा हूं, मुझे समझ में नहीं आता कि से सब भ्रमित क्यों हो जाता है?
सैम ने आगे कहा, इसलिए भारत के लोगों को फैसला करना होगा। ये मोदी बनाम कौन या बीजेपी बनाम कांग्रेस के बीच का चुनाव नहीं है। ये एक ऐसे राष्ट्र की नियति का फैसला करने का चुनाव है, जहां लोकतंत्र, स्वतंत्रता, मानवाधिकार, समानता और समावेश, इन सभी की गारंटी हमारे संविधान में दी गई है।"
सैम के बयान पर क्यों मचा बवाल?
दरअसल इससे पहले न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए सैम पित्रोदा ने कहा, "मुझे किसी भी धर्म से कोई दिक्कत नहीं है। कभी-कभार मंदिर जाना ठीक है, लेकिन आप उसे मुख्य मंच नहीं बना सकते। 40 फीसदी लोग बीजेपी को वोट देते हैं और 60 फीसदी लोग BJP को वोट नहीं देते। वह सबके प्रधानमंत्री हैं, किसी पार्टी के प्रधानमंत्री नहीं और यही संदेश भारत के लोग उनसे चाहते हैं।"
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, "रोजगार के बारे में बात करें, महंगाई के बारे में बात करें, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और चुनौतियों के बारे में बात करें। उन्हें (लोगों को) तय करना होगा कि असली मुद्दे क्या हैं- क्या राम मंदिर असली मुद्दा है? या बेरोजगारी असली मुद्दा है। क्या राम मंदिर असली मुद्दा है या महंगाई असली मुद्दा है?"
उनका ये बयान ऐसे समय आया, जब देशभर में राम मंदिर के उद्घाटन को लेकर तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही है और कुछ महीनों बाद ही देश में लोकसभा चुनाव भी हैं।
ऐसे में इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष ने मंदिर पर सवाल उठाकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जाहिर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी इसे चुनाव में भुनाने की कोशिश जरूर करेगी और उसने इस पर तीखी प्रतिक्रिया भी दी है।