ED Raid on Sanjay Singh: AAP सांसद संजय सिंह के घर पर ED का छापा, तलाशी अभियान जारी

ED Raid on Sanjay Singh: आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह के यहां प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापा मारा है। बताया जा रहा है कि यह छापेमारी कथित दिल्ली शराब घोटाले से जुड़ी हुई है। इसी मामले में दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया इस साल फरवरी से जेल में बंद हैं

अपडेटेड Oct 04, 2023 पर 9:02 AM
ED Raid on Sanjay Singh: शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया को 26 फरवरी को CBI ने गिरफ्तार किया था।

ED Raid on Sanjay Singh: आम आदमी पार्टी (AAP) सांसद संजय सिंह के आवास पर सुबह-सुबह प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate - ED) की टीम पहुंच गई है। ED की टीम फिलहाल उनके आवास पर छापेमारी कर रही है। इससे पहले इसी साल मई के महीने में भी संजय सिंह के घर पर ED ने छापेमारी की थी। उस समय उनके सहयोगियों के घर और दफ्तरों पर तलाशी अभियान चलाया गया था। यह छापेमारी कथित शराब नीति घोटाले से जुड़ी हुई है। प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के मुताबिक दिल्ली आबकारी नीति केस में दो आरोपी गवाह बन गए हैं। उनसे मिली सूचना के आधार पर ED ने संजय सिंह के घर यह सर्च ऑपरेशन चलाया।

ED 2020 दिल्‍ली एक्साइज पॉलिसी में कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है। इस मामले में दिल्‍ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया जा चुका है। उनकी जमानत याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। ED के अलावा CBI भी शराब नीति से जुड़े एक और केस की जांच में लगी हुई है।

ED की रडार पर AAP के कई नेता


इससे पहले भी आम आदमी पार्टी के तमाम नेता जांच एजेंसियों के रडार पर आ चुके हैं। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पिछले साल मई में आप सरकार में मंत्री रहे सत्येन्द्र जैन को गिरफ्तार किया था। हालांकि, अभी वे बीमारी के चलते सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत पर हैं। वहीं दिल्ली शराब नीति में घोटाले के आरोप में CBI ने इसी साल फरवरी में डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। सिसोदिया अभी जेल में बंद हैं। हालांकि, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल अपनी पार्टी के नेताओं को कट्टर ईमानदार बता रहे हैं।

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शराब घोटाले में सरकारी खजाने को लगा चूना

दरअसल, दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 से दिल्ली में नई एक्साइज एक्साइज पॉलिसी लागू कर दी थी। इस नई शराब नीति के तहत शराब का बिजनेस पूरी तरह से निजी हाथों में सौंप दिया गया था। इससे दिल्ली सरकार पूरी तरह से बाहर हो गई। दिल्ली सरकार ने उस दौरान तर्क दिया था कि इस नई पॉलिसी से माफिया राज खत्म हो जाएगा। ये भी दावा किया गया था कि इससे सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा। हालांकि इसके नतीजे बिल्कुल उल्टा आए। सरकारी खजाने में तगड़ा चूना लगा।

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