Election Commission : चुनाव में ब्लैकमनी के इस्तेमाल पर शिकंजा! सरकार 2,000 रुपये से ज्यादा नकद चंदे पर जल्द लगा सकती है रोक

Election Commission ने अज्ञात स्रोत से मिले चंदे की सीमा 20,000 से घटाकर 2,000 रुपये करने का प्रस्ताव भेजा है, जिस पर सरकार सक्रिय रूप से विचार कर रही है

अपडेटेड Oct 07, 2022 पर 10:32 AM
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Election Commission ने सरकार को अज्ञात स्रोत से मिले चंदे की सीमा 20,000 से घटाकर 2,000 रुपये करने का प्रस्ताव भेजा है

Election Commission : भले ही चुनाव आयोग के चुनावी वादों से जुड़े हाल के एक प्रस्ताव से राजनीतिक बहस छिड़ गई है, लेकिन राजनीतिक दलों से जुड़े एक बहुप्रतीक्षित सुधार पर उसे सरकार से जल्द ही हरी झंडी मिल सकती है।

Election Commission ने सरकार को अज्ञात स्रोत से मिले चंदे की सीमा 20,000 से घटाकर 2,000 रुपये करने का प्रस्ताव भेजा है, जिस पर सरकार सक्रिय रूप से विचार कर रही है। ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में ईसी अधिकारियों और कानून मंत्रालय के बीच नियमित रूप से बैठकें चल रही हैं।

चुनाव आयोग ने की थी यह मांग


इससे पहले चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय से राजनीतिक दलों के नकद चंदे की सीमा तय करने की मांग की है। चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को पत्र लिख कर यह सिफारिश की थी। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) से अपील की थी कि चंदे की सीमा तय की जाए। चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को मिलने वाले नकद चंदे की सीमा को 20,000 रुपये से घटाकर 2,000 रुपये करने की सिफारिश की है।

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20 फीसदी की सीमा लगाने की भी है योजना

इसके साथ ही, चुनाव आयोग ने नकद चंदे को 20 प्रतिशत या अधिकतम 20 करोड़ रुपये तक सीमित करने का प्रस्ताव दिया है। चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय से जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधनों की सिफारिश की है। चुनाव आयोग ने कहा प्रस्तावों का मकसद राजनीतिक दलों को मिले चंदे में सुधार और पारदर्शिता लाना है।

नकद चंदे को पूरी तरह खत्म करने की है जरूरत

एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव सुधारों से जुड़ी संस्था एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (Association for Democratic Reforms) के संस्थापक सदस्य जगदीश एस छोकर ने इस मुद्दे पर कहा है कि असल में तो नकद चुनावी चंदे को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए। छोकर ने कहा कि अभी इलेक्शन में नकद चंदे की सीमा 20 हजार रुपये है। किसी भी प्रकार के डिसक्लोजर या जवाबदेही से बचने के लिए राजनीतिक दल, दानदाता आदि 19,999 रुपये की पर्ची काटते हैं और जवाबदेही से बच जाते हैं। अगर इस सीमा को घटाकर 2 हजार रुपये भी किया जाता है तो भी फायदा नहीं होगा। इसके बाद लोग 1999 रुपये की पर्चियां काटने लगेंगे।

जगदीश एस छोकर ने कहा कि सरकार को चाहिए कि इस पर पूरी तरह पाबंदी लगाए। आज के डिजिटल युग में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सारा चंदा ऑनलाइन ही किया जाना चाहिए।

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