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Karnataka CM Race: CBI, ED,IT के 8 मामले और एक समन, डीके शिवकुमार और कर्नाटक CM की कुर्सी के बीच आ रही ये अड़चन

Karnataka CM Race: डीके शिवुकमार के खिलाफ कई कानूनी मुकदमें चल रहे हैं। CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग (IT) और कर्नाटक लोकायुक्त की तरफ से दायर आठ मामले, और ED की तरफ से एक समन - ये नौ मामले हैं, वर्तमान में डीके शिवकुमार जिनका सामना कर रहे हैं और ये मामले ही उनके और CM की कुर्सी के बीच में आ रहे हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड May 17, 2023 पर 8:11 PM
Karnataka CM Race: CBI, ED,IT के 8 मामले और एक समन, डीके शिवकुमार और कर्नाटक CM की कुर्सी के बीच आ रही ये अड़चन
कर्नाटक PCC प्रमुख डीके शिवकुमार अपने दिल्ली दौरे के दौरान कावेरी अपार्टमेंट में अपने भाई के आवास पर पहुंचे (PHOTO-PTI)

कर्नाटक के मुख्यमंत्री की रेस (Karnataka CM Race) में अब राज्य कांग्रेस (Congress) के प्रमुख डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) पिछड़ते दिखाई दे रहे हैं। सिद्धारमैया (Siddaramaiah) उनके मुकाबले मजबूती से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, लेकिन साथ ही वे पार्टी आलाकमान के सामने उन पहलुओं को भी रख रहे हैं, जिसमें डीके शिवुकमार के खिलाफ कई कानूनी मुकदमें चल रहे हैं। CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग (IT) और कर्नाटक लोकायुक्त की तरफ से दायर आठ मामले, और ED की तरफ से एक समन - ये नौ मामले हैं, वर्तमान में डीके शिवकुमार जिनका सामना कर रहे हैं और ये मामले ही उनके और CM की कुर्सी के बीच में आ रहे हैं।

दिलचस्प बात ये है कि ये सभी नौ मामले वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सामने लंबित हैं और शिवकुमार इन मामलों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। News18 के मुताबिक, इतना ही नहीं वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने शिवकुमार के खिलाफ लंबित मामलों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि उन्हें सीएम नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि केंद्रीय जांच एजेंसियां ​​​​जल्द ही उनके दरवाजे पर आ सकती हैं और इससे सरकार को संकट का सामना करना पड़ेगा। लेकिन मुकदमों की कानूनी स्थिति पर करीब से नजर डालने से पता चलता है कि शिवकुमार इन मुकदमों को रद्द कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं।

शुरुआती मामले 2012 के हैं, जिसमें कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने शिवकुमार पर दो मामलों में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। तब राज्य में बीजेपी सत्ता में थी, लेकिन तीन साल बाद हाईकोर्ट ने 2015 में इन दोनों मामलों को रद्द कर दिया।

लोकायुक्त ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन विशेष अनुमति याचिका (SLP) को वापस ले लिया गया था। 2019 में, उस SLP को बहाल करने के लिए एक याचिका दायर की गई थी, लेकिन अभी तक शिवकुमार को कोई नोटिस नहीं दिया गया है।

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