मध्य प्रदेश की नई सरकार ने सत्ता में आने के बाद एक साल से भी कम समय में हवाई यात्रा पर 32.85 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं, यानी औसतन हर दिन हवाई यात्रा पर 9.25 लाख रुपए खर्च किए गए। इस खुलासे ने राजनीतिक गलियारे में एक नई बहस छेड़ दी है, आलोचकों ने खर्च की राजकोषीय विवेकशीलता पर सवाल उठाया है। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा को बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकारी और निजी दोनों विमानों के जरिए 666 हवाई यात्राएं कीं।
NDTV के मुताबिक, इनमें से 428 किराए के विमानों से और 238 सरकारी स्वामित्व वाले विमानों और हेलीकॉप्टरों से यात्राएं की गई हैं। निजी विमानों का इस्तेमाल 222 बार किया गया, जो किराए पर लिए गए, इनमें अकेले 36.39 करोड़ रुपये खर्च हुए। 97 बार निजी हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया।
विमानन विभाग के अधिकारियों ने साफ किया कि सरकारी विमान उपलब्ध नहीं होने पर निजी विमान किराये पर लेना जरूरी हो जाता है। कुल इस्तेमाल का लगभग 90 प्रतिशत उपयोग मुख्यमंत्री की ओर से किया जाता है, जबकि दूसरे मंत्री काफी कम इस्तेमाल करते हैं।
2021 में क्रैश हुआ था राज्य सरकार का विमान
मई 2021 में रेमडेसिविर डिलीवरी मिशन के दौरान ग्वालियर एयरपोर्ट पर राज्य सरकार का C-90 विमान क्रैश हो गया था। पायलट की लापरवाही के कारण हुई इस दुर्घटना के कारण विमान बेकार हो गया। इस घटना के बाद से ही किराए के विमान पर निर्भरता काफी बढ़ गई थी।
तब से, राज्य ने नियमित रूप से विमान किराए पर लिए हैं। 2026 में 234 करोड़ रुपए का नया चैलेंजर 3500 जेट मध्य प्रदेश को मिलेगा, तब तक सरकार विमान किराये पर लेती रहेगी।
2021 में हुई दु्र्घटना में चालक दल घायल हो गया था, जिसके बाद सरकार की हवाई यात्रा नीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। क्षतिग्रस्त विमान को कमलनाथ सरकार ने 62 करोड़ रुपये में खरीदा था।
शिवराज सरकार ने खर्च किए हर घंटे 4 लाख रुपए
NDTV की रिपोर्ट में बताया गया कि शिवराज सिंह चौहान सरकार पर नजर डालें, तो हवाई यात्रा का उतना ही चौंका देने वाला रिकॉर्ड सामने आता है।
अप्रैल 2020 से मार्च 2023 तक सरकार ने हवाई यात्रा पर प्रति घंटे 4 लाख रुपए खर्च किए, इस दौरान 1,639 यात्राएं की गईं। उस समय, मध्य प्रदेश सरकार ने निजी विमानन कंपनियों को लगभग 37 करोड़ रुपए का भुगतान किया था।
मार्च 2023 में कांग्रेस विधायक मेवाराम जाटव ने विधानसभा में सवाल उठाते हुए प्राइवेट एविएशन कंपनियों के विमान और हेलीकॉप्टर किराये पर होने वाले खर्च का ब्यौरा मांगा था। तब शासन और कार्यकुशलता के आधार पर खर्च को सही भी ठहराया गया था।