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Maharashtra Bank Scam: बैंक घोटाले में दोषी पाए गए कांग्रेस के विधायक सुनील केदार, विधानसभा सदस्यता खत्म

Maharashtra Bank Scam: महाराष्ट्र कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। साल 2002 के बैंक घोटाले के मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस नेता सुनील केदार को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। उन्हें हाल ही में एक मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से 5साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 24, 2023 पर 4:26 PM
Maharashtra Bank Scam: बैंक घोटाले में दोषी पाए गए कांग्रेस के विधायक सुनील केदार, विधानसभा सदस्यता खत्म
Maharashtra Bank Scam: नागपुर में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सुनील केदार समेत छह लोगों को पांच साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।

Maharashtra Bank Scam: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुनील केदार का बड़ा झटका लगा है। उन्हें नागपुर जिला केन्द्रीय सहकारिता बैंक (एनडीसीसीबी) में धन के दुरुपयोग से जुड़े एक मामले में दोषी करार दिया गया है। इसके बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता खत्म हो गई है। राज्य विधानमंडल सचिवालय की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया कि 5 बार के विधायक केदार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (E) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 के तहत विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिए गए हैं।

आदेश में कहा गया कि नागपुर जिले में केदार के निर्वाचन क्षेत्र वाली साओनेर विधानसभा सीट दोषसिद्धि के बाद खाली हो गई है। नागपुर में मजिस्ट्रेट की एक अदालत ने एनडीसीसीबी से जड़े धन के दुरुपयोग के मामले में केदार और पांच अन्य को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। यह मामला साल 2002 का है।

10 लाख रुपये का लगा जुर्माना

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जे वी पेखले-पुरकर ने 2002 के मामले में यह फैसला सुनाया। मामले के सभी छह दोषियों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस मामले के आरोपियों में केदार के अलावा एनडीसीसीबी के महाप्रबंधक एवं निदेशक और एक निवेश कंपनी ‘होम ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड’ के एक निदेशक शामिल हैं। तीन लोगों को बरी कर दिया गया है। केदार को भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (एक लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और अन्य प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, एनडीसीसीबी को 2002 में सरकारी प्रतिभूतियों में 125 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसकी वजह ये है कि ‘होम ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए धन निवेश करते समय नियमों का उल्लंघन किया गया था। उस समय केदार बैंक के अध्यक्ष थे।

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