Maharashtra: 'कभी नहीं जा पाए CM हाउस', 'अपमानित' महसूस कर रहे थे शिवसेना के बागी विधायक, कांग्रेस, NCP को बताया 'असली विपक्ष'

एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने गुरुवार को एक पत्र ट्वीट किया। इसमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर बेहद ही गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पत्र को नाम दिया गया 'यह विधायकों की भावना है'

अपडेटेड Jun 23, 2022 पर 4:17 PM
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शिवसेना विधायकों ने पत्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर बेहद ही गंभीर आरोप लगाए हैं

महाराष्ट्र में गहराते राजनीतिक संकट (Maharashtra Political Crisis) के बीच, शिवसेना (Shiv Sena) के बागी नेता एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने गुरुवार को एक पत्र ट्वीट किया। इसमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर बेहद ही गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पत्र को नाम दिया गया "यह विधायकों की भावना है"। विधायक संजय शिरसाट की तरफ से लिखे गए इस खुले पत्र में बागी विधायकों की शिकायतों का जिक्र है।

पत्र में मुख्यमंत्री आवास में विधायकों को न जाने देने का आरोप लगाया गया है। पत्र में लिखा गया, "राज्य में शिवसेना का CM होने के बावजूद पार्टी के विधायकों को वर्षा बंगला (मुख्यमंत्री आवास) जाने का अवसर नहीं मिला। CM के आसपास के लोग तय करते थे कि हम उनसे मिल सकते हैं या नहीं। हमें लगा हमारा अपमान किया गया है।"

इसमें मुख्यमंत्री पर कभी सचिवालय न आने का आरोप भी लगाया गया है। इसमें लिखा, "मख्यमंत्री कभी सचिवालय में नहीं होते थे, बल्कि मातोश्री (ठाकरे निवास) में रहते थे।"


पत्र के मुताबिक, विधायकों ने कहा, "हम मुख्यमंत्री के आस-पास के लोगों को फोन करते थे, लेकिन वे कभी हमारे कॉल अटेंड नहीं करते थे। हम इन सब बातों से तंग आ चुके थे और एकनाथ शिंदे को यह कदम उठाने के लिए मनाया गया।"

इस पत्र में महा विकास अघाड़ी में गठबंधन साथी कांग्रेस और NCP को 'असली विपक्ष' बताया गया है। लिखा गया, "हम मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाते थे, लेकिन हमारे 'असली विपक्ष' कांग्रेस और NCP के लोगों को उनसे मिलने का मौका मिलता था। यहां तक कि उन्हें उनके निर्वाचन क्षेत्रों में काम के लिए पैसा भी दिया जाता था।"

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वहीं हिंदुत्व और आदित्य ठाकरे के अयोध्या दौरे पर नाराजगी जताते हुए, पत्र में विधायकों ने कहा, "जब हिंदुत्व और राम मंदिर पार्टी के लिए अहम मुद्दे हैं, तो पार्टी ने हमें अयोध्या जाने से क्यों रोका। आदित्य ठाकरे की अयोध्या यात्रा के दौरान विधायकों को बुलाया गया और अयोध्या जाने से रोका गया।"

उद्धव की भावुक अपील के जवाब में लिखा पत्र

दरअसल ये पत्र ठाकरे के उस संबोधन के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने विद्रोह करने वाले अपने साथियों से भावनात्मक अपील की थी। ठाकरे ने सीएम और शिवसेना अध्यक्ष का पद छोड़ने की पेशकश करते हुए कहा कि अगर कोई शिव सैनिक उनकी जगह लेता है तो उन्हें खुशी होगी।

विद्रोह पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए ठाकरे ने कहा कि अगर बागी नेता और उनका समर्थन करने वाले विधायक ये कहते हैं कि वे नहीं चाहते कि वह मुख्यमंत्री बने रहें, तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा, 'सूरत और असम से बयान क्यों देते हैं। मेरे मुंह पर आकर कह दो कि मैं मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष का पद संभालने में अक्षम हूं। मैं तुरंत इस्तीफा दे दूंगा। मैं अपना त्यागपत्र तैयार रखूंगा और आप आकर उसे राजभवन ले जा सकते हैं।"

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