Maharashtra Political Crisis: शिवसेना विधायकों के विद्रोह के तुरंत बाद 22 जून को ही इस्तीफा देना चाहते थे उद्धव ठाकरे
महाराष्ट्र की सियासी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना के बागी विधायकों को फौरी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने एकनाथ शिंदे वाले बागी गुट को 11 जुलाई तक अयोग्य करार देने से रोक लगा दी है
सूत्रों ने बताया कि NCP प्रमुख शरद पवार के कहने पर ठाकरे ने अपना मन बदल लिया
Maharashtra Political Crisis: शिवसेना नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के बागी तेवरों के बाद महा विकास अघाडी (MVA) सरकार की स्थिरता पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिवसेना विधायकों के विद्रोह के तुरंत बाद सीएम पद से इस्तीफा देने का मन बना लिया था।
सूत्रों ने बताया, 22 जून को जब एकनाथ शिंदे अपने समर्थकों के साथ सूरत चले गए थे, उसी दिन शाम 5 बजे फेसबुक लाइव में उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का मन बना लिया था। लेकिन महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार के एक बड़े नेता के कहने पर उन्होंने अपना फैसला टाल दिया।
शरद पवार के कहने पर बदल लिया मन
सूत्रों ने बताया कि विशेष रूप से एनसीपी प्रमुख शरद पवार के कहने पर ठाकरे ने अपना मन बदल लिया। इसी वजह से उस दिन फेसबुक लाइव आधे घंटे की देरी से शुरू हुआ था। अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने कहा था कि वह इस्तीफा देने को तैयार हैं, लेकिन बागी विधायकों को मुंबई आना होगा। इसके कुछ घंटे बाद उद्धव ठाकरे ने परिवार समेत आधिकारिक सीएम आवास वर्षा छोड़ दिया था और अपने निजी आवास मातोश्री में शिफ्ट हो गए।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, उद्धव ठाकरे 22 जून को शाम 5 बजे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले थे। सूत्रों के अनुसार, सियासी संकट का हल ढूंढने के लिए उद्धव ठाकरे बीजेपी नेताओं के संपर्क में थे। ठाकरे ने 22 जून को ही इस्तीफा देने की योजना बना ली थी।
इसके बाद वह शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के मेमोरियल पर जाने वाले थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यहां तक कि 22 जून को शाम 5 बजे उद्धव ठाकरे का महाराष्ट्र की जनता के नाम संबोधन शेड्यूल था, लेकिन अचानक प्लान में बदलाव के चलते यह आधे घंटे देर से प्रसारित हुआ।
सुप्रीम कोर्ट से बागियों को राहत
उधर, सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को महाराष्ट्र के सियासी मामले में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष द्वारा जारी अयोग्यता नोटिस के खिलाफ शिवसेना के बागी विधायकों को राहत प्रदान करते हुए कहा कि संबंधित विधायकों की अयोग्यता पर 11 जुलाई तक फैसला नहीं लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने अयोग्यता नोटिस की वैधानिकता को चुनौती देने वाले बागी विधायकों की याचिकाओं पर जवाब मांगा।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया, जिसमें विधानसभा में बहुमत परीक्षण नहीं कराए जाने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने कहा कि वे किसी भी अवैध कदम के खिलाफ उसका रुख कर सकते हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की अवकाशकालीन पीठ ने महाराष्ट्र सरकार को शिवसेना के 39 बागी विधायकों और उनके परिवार के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की सुरक्षा करने का निर्देश भी दिया।
महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष को नोटिस जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बागी विधायकों द्वारा दिए गए अविश्वास प्रस्ताव नोटिस को हलफनामा रिकॉर्ड में रखने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील के उस बयान को भी रिकॉर्ड में लिया कि बागी विधायकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।
आपको बता दें कि महाराष्ट्र के शिवसेना विधायक और मंत्री एकनाथ शिंदे ने उपाध्यक्ष द्वारा उन्हें और अन्य बागी विधायकों को जारी अयोग्यता नोटिस के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है। एकनाथ शिंदे और बड़ी संख्या में विधायकों ने 21 जून को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत की और वर्तमान में वे असम के गुवाहाटी में हैं।
ये मंत्री अब तक शिंदे गुट में हुए शामिल
अब तक महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री गुलाबराव पाटिल, दादा भुसे, संदीपन भुमरे और राज्य मंत्री शंबुराजे देसाई और अब्दुल सत्तार विद्रोही खेमे में शामिल हो चुके हैं। एक अन्य मंत्री प्रहार जनशक्ति पार्टी के बाचु कडू और शिवसेना कोटे से निर्दलीय मंत्री राजेंद्र येद्रावकर भी शिंदे के साथ डेरा डाले हुए हैं।
अब तक, राज्य के कैबिनेट मंत्री गुलाबराव पाटिल, दादा भुस, संदीपन भुमरे, और राज्य मंत्री शंबुराजे देसाई एवं अब्दुल सत्तार विद्रोहियों के खेमे में शामिल हो चुके हैं। प्रहार जनशक्ति पार्टी के एक अन्य मंत्री बच्चू कडू और शिवसेना कोटे से एक निर्दलीय मंत्री राजेंद्र येद्रावकर भी शिंदे के साथ गुवाहाटी में डेरा डाले हुए हैं।