Mukhtar Ansari's Death: नवंबर 2005 की बात है जब बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय (BJP MLA Krishnanand Rai) एक क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन कर घर लौट रहे थे। जैसे ही वह गाजीपुर के भावरकोल में एक पुल पर पहुंचे बीजेपी नेता के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया और AK-47 राइफलों से लैस हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं, जिसमें राय की मौत हो गई। FIR के अनुसार, गैंगस्टर से राजनेता मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) और उनके भाई अफजल अंसारी को मुख्य साजिशकर्ता थे। गाजीपुर जिले में तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय की 29 नवंबर, 2005 को हुई थी।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में आतंक का पर्याय बने गैंगस्टर-नेता मुख्तार अंसारी की गुरुवार को बांदा के एक अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। अंसारी की मौत के साथ ही अपराध के एक युग और राजनीति के साथ उसके गठजोड़ के एक अध्याय का अंत हो गया। अंसारी के खिलाफ हत्या से लेकर जबरन वसूली तक के 65 मामले दर्ज थे, फिर भी वह विभिन्न राजनीतिक दलों के टिकट पर पांच बार विधायक चुना गया। साल 1963 में एक प्रभावशाली परिवार में जन्मे अंसारी ने राज्य में पनप रहे सरकारी ठेका माफियाओं में खुद को और अपने गिरोह को स्थापित करने के लिए अपराध की दुनिया में प्रवेश किया।
19 साल बाद बेटे का छलका दर्द
19 साल बाद कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय (Piyush Rai) का कहना है कि मुख्तार अंसारी की मौत सर्वशक्तिमान का फैसला है। CNN-News18 से बात करते हुए पीयूष ने कहा कि राज्य सरकार उन आरोपों पर गौर करेगी कि अंसारी को जेल में जहर दिया गया था, लेकिन "हमें खुशी है कि भगवान ने आखिरकार अपना फैसला सुनाया"। उन्होंने कहा, "उनके दरबार से जो कुछ भी आएगा हमें उसे स्वीकार करना चाहिए। आज मैंने अपनी मां के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन किए। हमने ईश्वर को उस कठिन दौर से निपटने की शक्ति देने और हमें अंत देने के लिए धन्यवाद दिया। जब हम उस वक्त को याद करते हैं तो सिहर उठते हैं।"
पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए पीयूष ने आगे कहा, "सरकार की मंशा समाज की भलाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उस समय की समाजवादी पार्टी सरकार के पास कोई विजन नहीं था। स्पष्ट रूप से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 2017 के बाद से बदलाव आया है। हम उन लोगों के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति देखते हैं जो समाज में भ्रष्टाचार और लूट फैला रहे हैं। ये गैंगस्टर उस समय की SP और BSP सरकारों के तहत फल-फूल रहे थे।" बता दें कि अप्रैल 2023 में उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने अंसारी को दोषी ठहराया और राय की हत्या के लिए 10 साल जेल की सजा सुनाई।
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने और उनके परिवार ने इतने सालों तक इस तूफान का सामना कैसे किया, इस पर पीयूष ने कहा, "हमेशा कोई न कोई होता है जो लोगों के बलिदान पर नजर रखता है। जब भी मैं ऐसे गैंगस्टरों के खिलाफ खड़े होने को लेकर उदास होती थी, तो मेरी मां कहती थीं कि मुझे ईश्वर के साथ-साथ देश के संविधान और कानून पर भी भरोसा रखना चाहिए। यह हमारे लिए ख़ुशी की एक शुद्ध अनुभूति है।" मारे गए विधायक के बेटे ने राज्य से अराजकता को खत्म करने में मदद करने के लिए आदित्यनाथ सरकार को श्रेय दिया।
बांदा से पैतृक निवास ले जाया जा रहा मुख्तार का शव
बांदा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के एक समूह द्वारा पोस्टमॉर्टम किए जाने के बाद मुख्तार अंसारी के शव को गाजीपुर जिले के मोहम्दाबाद यूसुफपुर स्थित उसके पैतृक निवास ले जाया जा रहा है। बांदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज से पोस्टमॉर्टम के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच माफिया मुख्तार अंसारी का शव लेकर 26 गाड़ियों का काफिला शुक्रवार शाम पौने 5 बजे गाजीपुर के लिए रवाना हो गया।
इस काफिले में मौजूद मुख्तार के वकील नसीम हैदर ने बताया कि अंसारी का शव उसके छोटे बेटे उमर अंसारी, बहू निकहत अंसारी और दो चचेरे भाइयों के सुपुर्द किया गया। उन्होंने कहा कि शव के साथ एंबुलेंस में उमर अंसारी, निकहत अंसारी और दोनों चचेरे भाई बैठे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस अधिकारियों की 24 गाड़ियां काफिले में हैं और दो गाड़ियां अंसारी के परिवार की हैं।
मुख्तार के शव का पोस्टमॉर्टम बांदा में किया गया जो मोहम्मदाबाद (गाजीपुर) से लगभग 400 किलोमीटर दूर है। शव को फतेहपुर, कौशांबी, प्रयागराज, भदोही तथा वाराणसी आदि जिले के रास्ते उसके पैतृक निवास ले जाया जाएगा। अंसारी के शव को दफनाने के लिए उसके पैतृक स्थान पर काली बाग स्थित पारिवारिक कब्रिस्तान में गड्ढा खोदा गया है। अंतिम संस्कार का समय शव को लाए जाने के बाद तय किया जाएगा। गाजीपुर और मऊ समेत आसपास के जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।