Narada Sting Case: TMC नेताओं की जमानत पर HC की रोक, CBI की मांग- बंगाल से बाहर ट्रांसफर हो केस

जमानत मिलने के बाद भी CBI ऑफिस में मौजूद चारों नेताओं को सोमवार रात को ही प्रेसीडेंसी जेल ले जाया गया

अपडेटेड May 18, 2021 पर 2:29 PM
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नारदा स्टिंग टेप (Narada Sting Tape) मामले में गिरफ्तार किए गए पश्चिम बंगाल (West Bengal) के दो मंत्रियों और दो दूसरे TMC नेताओं को निचली अदालत से जमानत दे दी गई, लेकिन सोमवार शाम को CBI ने कलकत्ता हाई कोर्ट में इसे चुनौती दे दी और कोर्ट ने जमानत पर रोक लगा दी। CBI ने अपने दफ्तर के बाहर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के विरोध का हवाला देते हुए मामले की सुनवाई को बंगाल से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की।

जांच एजेंसी के अनुरोध पर, हाई कोर्ट ने फैसला किया कि नेताओं को जेल में हिरासत में रखा जाएगा। जमानत मिलने के बाद भी CBI ऑफिस में मौजूद चारों नेताओं को सोमवार रात को प्रेसीडेंसी जेल ले जाया गया।

सीबीआई ने सोमवार सुबह राज्य के दो मंत्री फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, TMC विधायक मदन मित्रा और पार्टी के पूर्व नेता सोवन चटर्जी को स्टिंग ऑपरेशन की जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया था, जिसमें राजनेताओं को कथित तौर पर कैमरे पर रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। हालांकि, CBI की एक विशेष अदालत ने उन्हें बाद में दिन में अंतरिम जमानत दे दी।

अदालत ने निर्देश दिया कि चारों व्यक्तियों में से प्रत्येक को जमानत बांड के रूप में 25,000 रुपये के दो मुचलके देने होंगे। चारों नेताओं को अगले आदेश तक मामले में हर 15 दिन में एक बार जांच अधिकारी से मिलने और उनके साथ सहयोग करने का भी निर्देश दिया गया।

कल क्या हुआ?

नेताओं की गिरफ्तारी से राज्य में राजनीतिक हड़कंप मच गया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छह घंटे तक जांच एजेंसी के कार्यालय में धरने पर बैठी रहीं। कई TMC समर्थकों ने भी परिसर को घेर लिया और राज्य के कई हिस्सों में हिंसक विरोध प्रदर्शन भी हुए।


तृणमूल कांग्रेस  ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर CBI का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए करने का आरोप लगाया, क्योंकि एजेंसी ने चार नेताओं को गिरफ्तार किया था, जो कथित तौर पर 2014 के एक न्यूज चैनल के स्टिंग में रिश्वत लेते हुए कैमरे में पकड़े गए थे।

क्या था नारदाा स्टिंग टेप

पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनावों से पहले सार्वजनिक किए गए नारदाा स्टिंग टेप को 2014 में शूट किए जाने का दावा किया गया था, जिसमें TMC के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों जैसे कई बड़े लोगों को कथित तौर पर एक काल्पनिक कंपनी के प्रतिनिधियों से पैसे लेते हुए देखा गया था। ये स्टिंग ऑपरेशन नारदाा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल ने किया था।

वहीं कलकत्ता हाई कोर्ट ने मार्च, 2017 में नारदा स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। सीबीआई ने 12 TMC नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए थे, जिनमें से कई अब BJP में हैं और एक IPS अधिकारी हैं।

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