क्या रानी की होगी वापसी? लंबे अंतराल के बाद PM मोदी के साथ मंच पर दिखीं वसुंधरा राजे, कर्नाटक की भूल सुधारने में लगी BJP

ऐसा माना जा रहा है कि BJP आगामी विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में फिर से उनके चेहरे पर दांव लगाएगी। इस साल प्रधानमंत्री के राजस्थान के पहले तीन दौरे नाथद्वारा, दौसा और भीलवाड़ा के दौरान राजे मंच पर मौजूद नहीं थीं। प्रधानमंत्री के मंच पर आने से कुछ मिनट पहले अजमेर समारोह में उनकी मौजूदगी सार्वजनिक नहीं थी

अपडेटेड Jun 01, 2023 पर 1:24 PM
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लंबे अंतराल के बाद PM मोदी के साथ मंच पर दिखीं वसुंधरा राजे

अजमेर में बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के साथ लंबे अंतराल के बाद मंच पर राजस्थान (Rajasthan) की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) की मौजूदगी ने जयपुर में राजनीतिक गलियारों में अटकलों को हवा दे दी है। ऐसा माना जा रहा है कि BJP आगामी विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में फिर से उनके चेहरे पर दांव लगाएगी। इस साल प्रधानमंत्री के राजस्थान के पहले तीन दौरे नाथद्वारा, दौसा और भीलवाड़ा के दौरान राजे मंच पर मौजूद नहीं थीं।

प्रधानमंत्री के मंच पर आने से कुछ मिनट पहले अजमेर समारोह में उनकी मौजूदगी सार्वजनिक नहीं थी। भले ही पूर्व मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन पीएम की सीट के ठीक बगल में उनकी उपस्थिति और जनता का अभिवादन करने के दौरान PM के बगल में अपने लिए जगह बनाने के लिए नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को धीरे से धकलते हुए उन्हें किसी ने नहीं देखा।

News18 से नाम न जाहिर करने की शर्त पर राजस्थान के एक वरिष्ठ BJP नेता ने कहा, "राजे एक अहम नेता हैं...राजस्थान में वह पार्टी की सबसे कद्दावर चेहरा बनी हुई हैं। फैक्ट यही है कि सचिन पायलट ने कथित भ्रष्टाचार के लिए राजे के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अपनी पार्टी में विद्रोह किया, जो दिखाता है कि वह राज्य के राजनीति के केंद्र में क्यों बनी हुई हैं और पार्टी उन्हें अनदेखा नहीं कर सकती है।"


नेता ने आगे ये भी कहा कि पार्टी अभी भी मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ सकती है और मुख्यमंत्री पद के लिए किसी स्पष्ट उम्मीदवार को पेश नहीं कर सकती है।

एक और BJP नेता ने कहा कि पार्टी के पास राज्य में सीपी जोशी, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत और राजेंद्र राठौर जैसे और भी वरिष्ठ चेहरे हैं।

पार्टी को पता है कि राजस्थान में पिछला विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने राजे को मुख्यमंत्री पद से हटाने के मुद्दे पर लड़ा था और तब ये नारा जनता में लोकप्रिय था- मोदी तुझसे वैर नहीं, पर रानी तेरी खैर नहीं।

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हालांकि, BJP जानती है कि राजे में मुख्यमंत्री के रूप में वापसी करने की क्षमता है, जैसा कि उन्होंने 2003 और 2013 में दिखाया था।

एक दूसरा फैक्टर, जो BJP के दिमाग पर भारी पड़ सकता है, वो है कर्नाटक की हार, जिसके लिए कई लोगों ने राज्य में पार्टी के सबसे बड़े चेहरे बीएस येदियुरप्पा को हटाने को जिम्मेदार ठहराया है, जो राज्य में चुनाव से दो साल पहले मुख्यमंत्री थे।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी राजस्थान में 'मुफ्त उपहार' का रास्ता अपना रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे कर्नाटक में उनकी पार्टी ने घोषणा की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री की यात्रा के तुरंत बाद बुधवार को 100 यूनिट मुफ्त बिजली देने की भी घोषणा की।

ऐसे में BJP के लिए साल के आखिर में होने वाले चुनावों में गहलोत को चुनौती देने के लिए राजे के रूप में अपने सबसे बड़े चेहरे को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। 2013 में गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस को 200 सीटों वाली विधानसभा में महज 21 सीटों पर सिमटा कर राजे मुख्यमंत्री बनी थीं।

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