Supreme Court News: दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले एक तीखी टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को चुनाव प्रचार के लिए धन आवंटित करने और जजों की सैलरी और पेंशन के भुगतान की उपेक्षा करने के लिए कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यों के पास फ्रीबीज यानी मुफ्त की रेवड़ियां बांटने के लिए पैसे हैं। लेकिन जजों की सैलरी और पेंशन देने के लिए पैसे नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकारों के पास उन लोगों के लिए पूरा पैसा है जो कुछ नहीं करते। लेकिन जब जजों की सैलरी की बात आती है तो सरकारें वित्तीय संकट का बहाना बनाती हैं।
जस्टिस बीआर गवई और एजी मसीह की पीठ ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें देश में जजों को दिए जाने वाले अपर्याप्त वेतन और रिटायरमेंट लाभों पर चिंता जताई गई थी। याचिका में कहा गया था कि जजों को समय पर सैलरी नहीं मिल रहा है। साथ ही रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली बेनिफिट्स से भी जज महरूम रह जा रहे हैं।
हाल के उदाहरणों का हवाला देते हुए पीठ ने महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली 'महायुति' द्वारा घोषित 'लड़की बहन' योजना और दिल्ली में चुनाव जीतने के लिए AAP और कांग्रेस द्वारा किए गए इसी तरह के वित्तीय वादों की ओर इशारा किया।
पीठ ने कहा, "जब जजों को सैलरी देने की बात आती है, तो राज्य अक्सर वित्तीय बाधाओं का हवाला देते हैं। हालांकि, चुनावों के दौरान हम 'लड़की बहन' पहल जैसी मुफ्त सुविधाओं की घोषणाएं भी देखें हैं। साथ ही दिल्ली में राजनीतिक दलों द्वारा किए गए इसी तरह के वित्तीय वादे देखते हैं। जहां चुनाव जीतने के लिए 2,100 रुपये या 2,500 रुपये देने का आश्वासन दिया जाता है।
सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने "मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना" शुरू करने की घोषणा की है।इसमें अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी के दिल्ली में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने पर महिलाओं को 2,100 रुपये की मासिक सहायता देने का वादा किया गया है।
AAP का मुकाबला करने के लिए दिल्ली कांग्रेस ने भी इसी तरह की योजना की घोषणा की है। इसमें आश्वासन दिया गया कि अगर पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में सत्ता में आती है, तो वह दिल्ली की महिलाओं को 2,500 रुपये की मासिक सहायता देगी।
दिल्ली में 70 विधानसभा सीटों के लिए 5 फरवरी को एक ही चरण में मतदान होगा। जबकि मतों की गिनती 8 फरवरी को होगी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 17 जनवरी है और नामांकन पत्रों की जांच 18 जनवरी तक की जाएगी।
केंद्र की तरफ से अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणि ने कहा कि सरकार ने नई पेंशन स्कीम में वित्तीय दबाव को ध्यान में रखा है। साथ ही उन्होंने मामले की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। मामले की सुनवाई 8 जनवरी को भी जारी रहेगी।