Punjab Farmers Protest: पंजाब (Punjab) के किसान (Farmers) एक बार फिर सड़कों पर उतार आए हैं। बैरिकेड्स, टिपर, पानी की बौछारें, ये कुछ ऐसी ही तस्वीर है, जब पंजाब के किसान तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की तरफ कूच कर रहे थे। इस बार ये किसान राशन, बिस्तर, पंखे, बर्तन और रसोई गैस सिलेंडर लेकर चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर (Chandigarh Mohali Border) के पास धरने पर बैठ गए हैं। मंगलवार को इन लोगों को राज्य की राजधानी जाने से रोक दिया गया।
देखा जाए तो सब कुछ पिछले किसान आंदोलन जैसा ही लगता है। फर्क है तो सिर्फ इतना कि इस बार ये लोग पंजाब की नई आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरे हैं। साथ ही इनकी मांग भी अलग हैं। ये किसान AAP सरकार पर गेहूं पर बोनस और 10 जून से धान की बुवाई शुरू करने समेत कई मांगों को लेकर दबाव बना रहे हैं।
किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने पंजाब सरकार को एक अल्टीमेटम भी दिया है। किसान नेता ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री भगवंत मान बुधवार तक प्रदर्शनकारियों के साथ उनकी शिकायतों के निवारण के लिए बैठक नहीं करते हैं, तो वे बैरिकेड्स तोड़ते हुए चंडीगढ़ की ओर बढ़ेंगे।
केंद्र शासित प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर कई किसान संगठनों के अनिश्चितकालीन विरोध के आह्वान के मद्देनजर चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
किसानों को चंडीगढ़ में घुसने से रोकने के लिए मोहाली पुलिस ने बैरिकेड्स और टिपर और वाटर कैनन लगा दिए है। चंडीगढ़ पुलिस ने भी इसी तरह के सुरक्षा इंतजाम किए हैं।
एक किसान नेता ने कहा, "यह पंजाब में हमारे संघर्ष की शुरुआत है। यह तब तक जारी रहेगा जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। यहां अब तक 25 फीसदी किसान ही आए हैं। बुधवार को और आएंगे। यह करो या मरो की लड़ाई है।"
कई किसान संघों ने केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर साल भर के आंदोलन की तर्ज पर चंडीगढ़ में अनिश्चितकालीन विरोध का आह्वान किया था।
क्या है इन किसानों की मांग?
दूसरी मांगों के अलावा, किसान भीषण गर्मी के कारण उपज में गिरावट का हवाला देते हुए प्रति क्विंटल गेहूं पर 500 रुपए का बोनस चाहते हैं। वे चाहते हैं कि सरकार उन्हें 18 जून के बजाय 10 जून से धान की बुवाई करने की अनुमति दे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहले 18 जून से बुवाई की घोषणा की थी।
वे मक्का और मूंग के न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए नोटिफिकेशन जारी करना और बासमती के लिए 4,500 रुपए प्रति क्विंटल MSP तय करना चाहते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सहकारी समितियों से कर्ज लेने वाले किसानों के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को रद्द करने और 2 लाख रुपए तक के कर्ज माफ करने की भी मांग की है।
वे यह भी मांग कर रहे हैं कि सरकार बिजली का लोड बढ़ने पर लगने वाले चार्ज को 4,800 रुपए से घटाकर 1,200 रुपए करे। 10 से 12 घंटे बिजली सप्लाई और गन्ना बकाया भुगतान जारी करने की भी मांग है। प्रदर्शनकारी स्मार्ट बिजली मीटर लगाने का भी विरोध कर रहे हैं।
राशन, बिस्तर, पंखे, कूलर, बर्तन, रसोई गैस सिलेंडर और दूसरे जरूरी सामान लेकर पंजाब भर के किसान मोहाली के गुरुद्वारा अम्ब साहिब में इकट्ठा हुए हैं।
दल्लेवाल ने मीडिया से कहा, "हमें चंडीगढ़ के DGP का मैसेज मिला कि सीएम मान के साथ बैठक बुधवार को सुबह 11 बजे तय की गई है। फिर एक और मैसेज आया, जिसमें कहा गया था कि सीएम दिल्ली गए हैं। मुख्य सचिव के साथ बैठक की जा सकती है।"
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के उम्मीद नहीं है कि एक सरकारी अधिकारी से मुलाकात कर, उन्हें अपने मुद्दों का समाधान मिलेगा।