कतर का एक डेलीगेशन भारतीय वायु सेना को 12 "कम इस्तेमाल किए जाने वाले" मिराज 2000 जेट की संभावित बिक्री पर बातचीत करने के लिए नई दिल्ली में है। इस डील के जरिए वायु सेना को ऐसे समय में ज्यादा लड़ाकू विमान सप्लाई किए जाएंगे, जब फोर्स के पुराने मिग लड़ाकू विमानों को धीरे-धीरे सर्विस से बाहर किया जा रहा है।
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा, वायु सेना की ओर से अब इस्तेमाल में आने वाले दो मिराज स्क्वाड्रनों को कतर के विमान को शामिल करने से लाभ हो सकता है, जो मिराज 2000-5 के मॉडर्न कॉन्सेप्ट के अनुसार तैयार किए गए हैं।
फ्रांस में बने मिराज 2000, जो भारतीय वायुसेना के प्रमुख स्ट्राइक विमानों में से एक थे, अब प्रोडक्शन में नहीं हैं, लेकिन उन्हें अगले 10 सालों तक भारतीय लिस्ट में रहना चाहिए। मनीकंट्रोल हिंदी स्वतंत्र रूप से रिपोर्ट की पुष्टि नहीं कर सका।
रिपोर्ट के अनुसार, विमानों को अच्छे से जांच परखने के बाद, डील की फाइनल कोस्ट तय की जाएगी। इसके 6,000 से 7,000 करोड़ रुपए के बीच होने का अनुमान है।
विमान को हथियारों और पुर्जों के साथ डिलीवर किया जाएगा, और उम्मीद है कि भारत उनके लिए कड़ी सौदेबाजी करेगा। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ये देखते हुए कि ग्वालियर में पहले से ही जमीनी उपकरण और मेंटेनेंस की सुविधाएं हैं, साथ ही पर्याप्त पायलट और तकनीकी सहायता कर्मचारी भी हैं, विमान को लड़ाई के लिए तैयार करना भी आसान होना चाहिए।
बालाकोट हमले में मिराज ने निभाया अहम रोल
अपनी विश्वसनीयता और बेहद सटीक एक्शन के कारण, भारत ने राफेल की शुरूआत से पहले वॉर ऑपरेशन के लिए मिराज फाइटर जेट को प्राथमिकता दी। 2019 में बालाकोट में आतंकी ट्रेनिंग कैंप पर इसी विमान ने सटीक हमले किए थे।
पुराने मिग-21 को बदलने के लिए स्क्वाड्रनों के देरी से आने के कारण वायु सेना के पास लड़ाकू विमानों की भारी कमी हो गई है। जबकि 36 राफेल जेट का ऑर्डर दिया गया है, असल जरूरत उसी कैटेगरी के 126 जेट की थी।