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Ram Mandir: राम मंदिर का गवाह है इतिहास, विदेशी पर्यटकों ने लिखी है आंखों देखी कहानी, जानिए क्या है राम मंदिर का पूरा सच!

Ram Mandir: विलियम फ्रेंच के कथन से साफ है की जब वह अयोध्या गए थे, उस समय रामकोट में तमाम मंदिरों के बीच खंडहर भी था। यह अलग बात है कि उन्होंने बाबरी मस्जिद का कहीं जिक्र नहीं किया है, लेकिन इस तथ्य को भी समझना होगा, यह खंडहर कौन सा था, जहां पहुंच कर लोग पूजा कर रहे थे। उस खंडहर में लोगों की इतनी आस्था क्यों थी

Brijesh Shuklaअपडेटेड Dec 29, 2023 पर 1:18 PM
Ram Mandir: राम मंदिर का गवाह है इतिहास, विदेशी पर्यटकों ने लिखी है आंखों देखी कहानी, जानिए क्या है राम मंदिर का पूरा सच!
Ram Mandir: केवल विदेशी पर्यटक या व्यापारी ही नहीं बल्कि तमाम मुस्लिम लेखकों ने भी इसका जिक्र किया है कि कैसे बुत परस्ती के खिलाफ मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाई गई

Ram Mandir: 1608 ईस्वी में अंग्रेज व्यापारी विलियम फेंच अयोध्या (Ayodhya) में रामकोट के उस खंडहर में आते जाते श्रद्धालुओं को देख रहे थे। वह ईस्ट इंडिया कंपनी से जुड़े थे ओर व्यापार के लिए भारत आए थे। रामकोट (Ramkot) वह जगह है, जहां पर भगवान राम की जन्मभूमि है। उस खंडहर में महिलाएं पूजा करती थीं और फिर उस स्थान की परिक्रमा करती थीं। वास्तव में अंग्रेज व्यापारी के लिए यह दृश्य अद्भुत थे और उत्सुकता पैदा करने वाला भी। हिंदुओं के लिए वह बहुत ही पवित्र स्थान था। वहां पहुंचने वाले श्रद्धालु उसे राम जन्मभूमि (Ram Janmbhoomi) पुकारते थे।

अंग्रेज कारोबारी ने अपनी डायरी में लिखा था "अयोध्या के रामकोट में रानीचंद के महल और घरों के खंडहर भी हैं, जिन्हें भारतीयों ने महान भगवान के रूप में स्वीकार किया, यह कहते हुए कि उन्होंने दुनिया का तमाशा देखने के लिए शरीर धारण किया था। इन खंडहरों में निश्चित ब्राह्मण रहते हैं, जो ऐसे सभी भारतीयों के नाम दर्ज करते हैं, जो वहां बहने वाली नदी में नहाते हैं।"

विलियम फ्रेंच के कथन से साफ है की जब वह अयोध्या गए थे, उस समय रामकोट में तमाम मंदिरों के बीच खंडहर भी था। यह अलग बात है कि उन्होंने बाबरी मस्जिद का कहीं जिक्र नहीं किया है, लेकिन इस तथ्य को भी समझना होगा, यह खंडहर कौन सा था, जहां पहुंच कर लोग पूजा कर रहे थे। उस खंडहर में लोगों की इतनी आस्था क्यों थी?

विलियम फिंच ने इसे स्पष्ट भी किया है। विलियम फेंच इस मामले में और भी जानकारी दे सकते थे, लेकिन 1612 ईस्वी में पैदल मार्ग से ही ब्रिटेन लौट रहे थे और बगदाद में उनकी मृत्यु हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद डायरी और उनका दूसरा सामान सुरक्षित रख लिया गया।

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