Ram Mandir Inauguration: बिजनेसमैन या उद्योगपति नहीं, इस आध्यात्मिक गुरु ने दिया राम मंदिर को सबसे ज्यादा चंदा

Ram Mandir Inauguration: राम मंदिर परियोजना को अब तक 5,500 करोड़ रुपए से ज्यादा का दान मिल चुना है, और योगदान का सिलसिला अब भी जारी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मंदिर को अब का सबसे ज्यादा चंदा या दान किसने दिया? ये कोई देश के बड़े उद्योगपति, बिजनेसमैन या राजनेता नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक गुरु हैं

अपडेटेड Jan 11, 2024 पर 1:02 AM
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Ram Mandir Inauguration: बिजनेसमैन या उद्योगपति नहीं, इस आध्यात्मिक गुरु ने दिया राम मंदिर को सबसे ज्यादा चंदा

Ram Mandir Inauguration: भगवान राम के पवित्र बाल रूप, रामलला, अयोध्या (Ayodhya) में प्रतिष्ठित होने वाले हैं। भव्य राम मंदिर (Ram Mandir) का निर्माण पूरी तरह से भक्तों की तरफ से मिल रहे दान से किया जा रहा है। ये ऐतिहासिक अभिषेक समारोह 22 जनवरी को होने जा रहा है और इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और 6,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

राम मंदिर परियोजना को अब तक 5,500 करोड़ रुपए से ज्यादा का दान मिल चुना है, और योगदान का सिलसिला अब भी जारी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मंदिर को अब का सबसे ज्यादा चंदा या दान किसने दिया?

ये कोई देश के बड़े उद्योगपति, बिजनेसमैन या राजनेता नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक गुरु हैं... और ये कोई और नहीं महाकाव्य रामचरितमानस के प्रशंसित व्याख्याता मोरारी बापू (Morari Bapu) भी हैं, जो खुद को एक विनम्र फकीर बताते हैं, लेकिन उन्होंने मंदिर के निर्माण के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत दान देकर अपार उदारता दिखाई है।


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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, बापू ने मंदिर निर्माण में सहयोग के लिए 11.3 करोड़ रुपए का योगदान दिया। इसके अलावा, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में उनके अनुयायियों ने कुल 8 करोड़ रुपये का अलग-अलग दान दिया।

आध्यात्मिक नेता, राम भक्त या राम के अनुयायी, बापू मंदिर परियोजना के कट्टर समर्थक रहे हैं। बापू को रामचरितमानस के पाठ के लिए अच्छी खासी मान्यता प्राप्त है और वे भारत और विदेश दोनों में 50 से ज्यादा सालों से राम कथा, या महाकाव्य रामायण का पाठ करते आ रहे हैं। रामायण पर ही रामचरितमानस भी आधारित है।

कौन हैं मोरारी बापू?

1946 में गुजरात के भावनगर में जन्मे बापू आज भी अपने परिवार के साथ वहीं रहते हैं। उनके जीवन का सबसे बड़ा पहलू ये है कि उन्होंने 12 साल की उम्र में ही तुलसीदास की लिखी गई कविता- संपूर्ण रामचरितमानस कंठस्थ कर ली थी और 14 साल की उम्र में राम कथा का पाठ करना शुरू कर दिया था।रामचरितमानस में 10,000 से ज्यादा छंद हैं।

वैष्णव बावा साधु निम्बार्क वंश से संबंधित, बापू को रामायण में महारत हासिल करने और उनकी आकर्षक कहानी कहने के लिए जबरदस्त प्रशंसा हासिल है। उनका प्रभाव इतना है कि ब्रिटिश प्रधान मंत्री ऋषि सुनक भी उनकी कथा सुनने आ चुके हैं।

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