Ram Mandir: पहली बार किसने की थी राम मंदिर को हिंदुओं के हवाले करने की मांग

Ram Mandir: भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा शुरू की। यात्रा 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचनी थी। लेकिन आडवाणी की यात्रा को बिहार के समस्तीपुर में रोक दिया गया और श्री आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया। इससे नाराज भाजपा ने केंद्र में वी पी सिंह और उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव सरकार से समर्थन वापस ले लिया और वी पी सिंह सरकार का पतन हो गया

अपडेटेड Jan 16, 2024 पर 7:00 AM
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Ram Mandir: 1 जुलाई 1989 को विश्व हिंदू परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष जस्टिस देवकीनंदन अग्रवाल ने राम लला विराजमान को दोस्त बताते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की बाबरी मस्जिद को वहां से हटा कर कहीं और ले जाया जाए।

Ram Mandir: साल 1983। जगह, मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश। हिंदू मंच के सम्मेलन में कांग्रेस के नेता एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री दाऊ दयाल खन्ना ने अयोध्या की बाबरी मस्जिद, काशी की ज्ञानवापी और मथुरा की शाही मस्जिद को हिंदुओं को सौंपने की मांग की। इस संबंध में श्रीमती इंदिरा गांधी को एक पत्र भी लिखा। उनका कहना था कि यह तीनों स्थल हिंदुओं के पवित्रतम स्थलों को तोड़कर बनाए गए हैं। इस सभा में पूर्व अंतरिम प्रधानमंत्री गुलजारीलाल नंदा और संघ के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर राजेंद्र सिंह रज्जू भैया उपस्थित थे।

वास्तव में विश्व हिंदू परिषद के पहले कांग्रेस के इस नेता ने तीनों स्थलों को हिंदूओ को सौंपने की मांग पहली बार उठाई थी। उधर इस मुद्दे पर विश्व हिंदू परिषद पहले से ही आंदोलन की तैयारी कर रहा था। विश्व हिंदू परिषद ने 1984 में एक बाबरी मस्जिद और राम जन्म मुद्दे पर एक रणनीति तैयार की और एक नारा दिया कि "आगे बढ़ो जोर से बोलो जन्म भूमि का ताला खोलो।" इस नारे के साथ नेपाल के जनकपुर से लेकर दिल्ली तक संत यात्रा निकली। जनकपुर सीता जी की जन्मस्थली है।

संतों की यात्रा दिल्ली पहुंची ही थी कि इंदिरा गांधी की हत्या हो गई


संतों की यह यात्रा अयोध्या होते हुए लखनऊ पहुंची और फिर इसके आगे दिल्ली के लिए रवाना हुई। जब यह यात्रा दिल्ली के पास पहुंची तभी तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई और यात्रा को तत्काल स्थगित कर दिया गया। यह देश के लिए बहुत बड़ा झटका था। उधर देश की बागडोर राजीव गांधी के हाथ आ चुकी थी और वह भारी बहुमत से चुनाव जीत के प्रधानमंत्री बन गए थे। इसी बीच एक वृद्ध मुस्लिम महिला शाहबानो को गुजारा भत्ता देने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से मुसलमान सरकार से नाराज हो गए।

मुसलमानों की नाराजगी दूर करने के लिए राजीव गांधी ने संसद की बैठक में कानून बनाकर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को बदल दिया। देश एक नए मोड़ की तरफ बढ़ गया। उधर विश्व हिंदू परिषद फिर आक्रामक रुख अपना रहा था और राजीव गांधी पर मुस्लिम वर्ग का पैरोकार होने का आरोप जड़ रहा था। राजीव गांधी के कुछ नजदीकी दोस्तों ने उन्हें सलाह दी की शाहबानों मामले पर मुसलमानो की मांग मान लेने से मुस्लिम वर्ग उनका दीवाना हो चुका है। अब आप राम जन्मभूमि का ताला खुलवा दीजिए। हिंदू भी आपकी जेब में आ जाएंगे।

राम लला बाबरी मस्जिद में ताले में बंद हैं

1 फरवरी 1986 फैजाबाद के एक वकील उमेश चंद्र पांडेय ने जिला जज कृष्ण मोहन पांडे की अदालत में एक अपील दायर की थी कि राम लला बाबरी मस्जिद में ताले में बंद है। इसलिए वहां का ताला खोला जाए और हिंदुओं को पूजा पाठ का अधिकार दिया जाए। जिला जज कृष्ण मोहन पांडे ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक फैजाबाद को तलब किया और उनसे पूछा की किसके आदेश से ताला बंद है और यदि ताला खोल दिया जाए तो आप लोगों को कानून व्यवस्था कायम रखने में क्या कोई दिक्कत होगी। अधिकारियों ने कहा कि कानून व्यवस्था की कोई समस्या नहीं आएगी। यदि ताला खोल दिया जाए तो उन्हें कोई एतराज नहीं है।

जिला जज ने शाम 4:40 पर बाबरी मस्जिद का ताला खोल देने का आदेश दिए और 40 मिनट के अंदर ही राम जन्मभूमि का ताला खुल गया। घंटा घड़ियाल बजने लगे। भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। पूजा पाठ शुरू हो गया और हजारों लोग दर्शन के लिए पहुंचने लगे। ताला खोले जाने के विरोध में कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए 6 फरवरी 1986 को बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन हुआ। विवाद बढ़ता गया। बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ने ऐलान कर दिया की मुसलमान 12 अगस्त 1988 को अयोध्या की ओर कूंच करेंगे और बाबरी मस्जिद में नमाज पढ़ेंगे। लेकिन बाद में यह एलान वापस ले लिया गया।

राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे

उधर विश्व हिंदू परिषद ने राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे का नारा देकर बाबरी मस्जिद के स्थान पर राम मंदिर बनाने की घोषणा की। और 1 फरवरी 1989 को प्रयाग में आयोजित धर्म संसद में 10 नवंबर 89 को राम मंदिर के शिलान्यास की घोषणा कर दी। इस धर्म संसद में स्वयं देवरहा बाबा आए। उधर भाजपा ने हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर राम मंदिर बनाने का संकल्प लिया और इसे आस्था का सवाल बताया। पार्टी की इस निर्णय से राम मंदिर आंदोलन ने और गति पकड़ ली।

इसी बीच 1 जुलाई 1989 को विश्व हिंदू परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष जस्टिस देवकीनंदन अग्रवाल ने राम लला विराजमान को दोस्त बताते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की बाबरी मस्जिद को वहां से हटा कर कहीं और ले जाया जाए। वहां राम मंदिर का निर्माण किया जाए। केंद्र सरकार लगातार प्रयास करती रही की 9 नवंबर 1989 को विहिप द्वारा प्रस्तावित राम मंदिर से शिलान्यास के कार्यक्रम को किसी तरह स्थगित कराया जाए। इसके लिए कई दौर की वार्ता चली लेकिन जब सहमति नहीं बनी तो तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उत्तर प्रदेश सरकार ने मस्जिद से दूर शिलान्यास के लिए अनुमति दे दी। इस निर्णय से मुसलमान कांग्रेस से नाराज हो गए और मंदिर के शिलान्यास का फायदा बीजेपी ले गई।

कांग्रेस को देखना पड़ा हार का मुंह

1989 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस चुनाव हार गई और वी पी सिंह के नेतृत्व में केंद्र में मिली जुली सरकार का गठन हुआ। उधर 30 अक्टूबर 1990 को एक बार फिर कार सेवा का ऐलान कर दिया गया। वी पी सिंह के तमाम प्रयास के बावजूद मामला नहीं सुलझा और विहिप ने कार सेवा कार्यक्रम को स्थगित करने से इंकार कर दिया। टकराव बढ़ता गया।

भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा शुरू की। यात्रा 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचनी थी। लेकिन आडवाणी की यात्रा को बिहार के समस्तीपुर में रोक दिया गया और श्री आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया। इससे नाराज भाजपा ने केंद्र में वी पी सिंह और उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव सरकार से समर्थन वापस ले लिया और वी पी सिंह सरकार का पतन हो गया। लेकिन उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने मुलायम सरकार को अपना समर्थन दिया।

मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का ऐलान 

उधर 30 अक्टूबर की प्रस्तावित कारसेवा को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने घोषणा की अयोध्या की बाबरी मस्जिद में परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा। किसी भी कीमत पर कारसेवा नही करने दी जाएगी। इसके लिए ट्रेनों तक को रोक दिया गया और फैजाबाद जाने वाले सभी रास्तों को सील कर दिया गया। कार सेवक किसी भी हालत में अयोध्या ना पहुंचने पाए इसके सारे प्रयास किए गए। इसके बावजूद कार सेवक अयोध्या पहुंच गए और तमाम प्रतिबंध तोड़ते हुए बाबरी मस्जिद के ऊपर चढ़ गए।

इस घटना से मुलायम सरकार हिल गई और इसका परिणाम यह हुआ की 2 नवंबर को कार सेवकों पर गोली चलाई गई और उसमें बड़ी संख्या में कारसेवक मारे गए। मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अप्रैल माह में अकस्मात अपने पद से इस्तीफा दे दिया और विधान सभा भंग कर चुनाव मैदान में उतर गए। विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव को हार का मुंह देखना पड़ा और उत्तर प्रदेश में पहली बार भाजपा की सरकार बनी और कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बन गए।

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