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सिंधुघाटी सभ्यता के गवाह लोथल में 4000 करोड़ निवेश से बनेगा मैरीटाइम म्यूजियम, सर्बानंद सोनोवाल ने बताया पूरा प्लान

लोथल सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख शहरों में से एक था। यह इस सभ्यता का प्रमुख बंदरगाह भी था। इस बंदरगाह के जरिए मेसोपोटामिया, मिस्र, पर्शिया और दूसरी सभ्यता के साथ सिंधु घाटी सभ्यता का व्यापार होता था। लोथल पहले से गुजरात में UNESCO का वर्ल्ड हेरिटेज साइट है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 16, 2024 पर 12:17 PM
सिंधुघाटी सभ्यता के गवाह लोथल में 4000 करोड़ निवेश से बनेगा मैरीटाइम म्यूजियम, सर्बानंद सोनोवाल ने बताया पूरा प्लान
लोथल को फिर से विकसित करने के लिए सरकार 12 देशों के एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर काम कर रही है।

गुजरात का लोथल इंटरनेशन टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनेगा। सरकार ने इस बारे में बड़ा प्लान तैयार किया है। केंद्र सरकार यहां नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्पलेक्स म्यूजियम बनाने और लोथल को विकसित करने पर अगले 5 सालों में 4,000 करोड़ रुपये निवेश करने जा रही है। इसका मकसद मैरीटाइम इंडस्ट्री में इंडिया के एतिहासिक महत्व से दुनिया को अवगत कराना है। केंद्रीय मंत्री सर्बनानंद सोनोवाल ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी। लोथल 2600 बीसी की प्राचीन हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख केंद्रों में से एक था। खुदाई में लोथल में सबसे पुराना मानव-निर्मित डॉकयार्ड मिला था, जो 5000 साल से ज्यादा पुराना है।

लोथल के बंदरगाह से मिस्र, पर्शिया को होता था निर्यात

लोथल (Lothal) सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) के प्रमुख शहरों में से एक था। यह इस सभ्यता का प्रमुख बंदरगाह भी था। इस बंदरगाह के जरिए मेसोपोटामिया, मिस्र, पर्शिया और दूसरी सभ्यता के साथ सिंधु घाटी सभ्यता का व्यापार होता था। लोथल पहले से गुजरात में UNESCO का वर्ल्ड हेरिटेज साइट है। मनीकंट्रोल से बातचीत में सोनोवाल ने कहा, "करीब 5,000 साल पहले भारत बाकी दुनिया से व्यावसायिक गतिविधियों, समुद्री व्यापार, संस्कृति और सभ्यता के जरिए जुड़ा हुआ था। लोथल को नया टूरिस्ट हब बनाने से इंडिया के एतिहासिक महत्व के बारे में दुनिया को बताने में मदद मिलेगी।"

लोथल के आसपास इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगी सरकार

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