सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैन्यकर्मियों को OROP के तहत बकाया पेंशन पेमेंट के लिए समयसीमा तय की

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट के बेंच ने कहा कि कोर्ट की तरफ से तय समयसीमा के अंदर ओआरओपी के तहत पेंशन के बकाया का पेमेंट नहीं कर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया है। उधर, सरकार ने कहा कि बकाया पेमेंट का बहुत ज्यादा बोझ उस पर आएगा, जिससे उसके लिए एकमुश्त पेंमेंट करना मुश्किल है

अपडेटेड Mar 20, 2023 पर 5:37 PM
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चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बैंक ने कहा कि उसे किस्तों में ओआरओपी पेमेंट से जुड़े रक्षा मंत्रालय के एकतरफा पत्र से निराशा हुई है। यह 15 मार्च तक बकाया भुगतान के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को केंद्र सरकारो को पूर्व सैन्य कर्मियों (Ex Military Personnel) को वन रैंक-वन पेंशन (OROP) का बकाया अमाउंट देने का आदेश दिया है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा है कि केंद्र सरकार चरणबद्ध तरीके से बकाया पैसा का भुगतान शर्तें पूरी करने वाले पूर्व सैन्य कर्मियों को करे। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, इससे पहले केंद्र सरकार ने कोर्ट को बतया था कि उस पर 28,000 करोड़ रुपये का बोझ आएगा। इसलिए एक बार में बकाया रकम का भुगतान करना उसके लिए मुमकन नहीं है। इससे डिफेंस मैनेजमेंट पर खराब असर पड़ सकता है।

कब तक होना है पेमेंट?

ANI के मुताबिक, शर्तें पूरी करने वाले फैमिली पेंशनर्स और गैलेंटरी विनर्स को ओआरओपी स्कीम के तहत बकाया अमाउंट का पेमेंट 30 अप्रैल तक होना है। 70 साल से ऊपर के पेंशनर्स को इसका पेमेंट 30 जून तक होना है। बाकी सभी शर्तें पूरी करने वाले पेंशनर्स को बराबर किस्तों में 30 अगस्त, 30 नवंबर और 28 फरवरी, 2024 तक बराबर किस्तों में बकाया पैसे का भुगतान होना है।


सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने क्या कहा?

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बैंक ने कहा कि उसे किस्तों में ओआरओपी पेमेंट से जुड़े रक्षा मंत्रालय के एकतरफा पत्र से निराशा हुई है। यह 15 मार्च तक बकाया भुगतान के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। लेकिन पैसे के पेमेंट में केंद्र सरकारी की दिक्कत की वजह है इस मामले से जुड़े राष्ट्रीय हित की अनदेखी नहीं की जा सकती। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बकाया भुगतान के मसले पर सीलबंद लिफाफे में केंद्र सरकार की राय को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

सीलबंद लिफाफे का इस्तेमाल बंद होना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, "हमें सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे के इस्तेमाल के प्रैक्टिस को बंद करने की जरूरत है... यह जस्टिस की बुनियादी प्रक्रिया का उल्लंघन है।" चीफ जस्टीस ने कहा, "मैं व्यक्तिगत रूप से सीलबंद लिफाफे के खिलाफ हू। कोर्ट में पारदर्शिता होना जरूरी है...यह आदेश के पालन से जुड़ा है। इसमें क्या गोपनीयता हो सकती है।" देश की सबसे बड़ा अदालत ने पिछले हफ्ते सैन्य कर्मियों को पेंशन के बकाए का भुगतान नहीं होने पर चिंता जताई थी। उसने कहा था कि यह दूसरा मौका है जब सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया है।

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