अमेरिका के न्यू जर्सी में भारत के बाहर सबसे बड़े हिंदू मंदिर का उद्घाटन होने वाला है। इस मंदिर का उद्घाटन 8 अक्टूबर को होगा। न्यू जर्सी के छोटे रॉबिन्सविले टाउनशिप में बीएपीएस स्वामीनारायण अक्षरधाम को पूरे अमेरिका से 12,500 से भी ज्यादा लोगों ने मिल कर बनाया है। इस मंदिर का निर्माण साल 2011 में शुरू हुआ था।
उद्घाटन से पहले ही आते हैं हजारों लोग
इस मंदिर के उद्घाटन से पहले देश भर से हजारों हिंदू यहां पर दर्शन करने के लिए आते हैं। अक्षरधाम के नाम से फेमस इस मंदिर की माप 255 फीट x 345 फीट x 191 फीट है और यह 183 एकड़ में फैला है। इसे प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार डिजाइन किया गया है और इसमें 10,000 मूर्तियों और प्रतिमाओं, भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों की नक्काशी और नृत्य रूपों सहित प्राचीन भारतीय संस्कृति के डिजाइन शामिल किए गए हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि कंबोडिया के अंगकोरवाट के बाद यह दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर है।
अंगकोरवाट है दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर
12वीं सदी का अंगकोरवाट मंदिर परिसर, दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। यह 500 एकड़ में फैला हुआ है और अब यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है। नई दिल्ली में अक्षरधाम मंदिर, जिसे नवंबर 2005 में जनता के लिए खोला गया था, 100 एकड़ में फैला हुआ है। BAPS स्वामीनारायण संस्था के अक्षरवत्सलदास स्वामी ने समाचार एजेंसी PTI को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि हमारे आध्यात्मिक नेता स्वामी महाराज का ऐसा विजन था कि पश्चिमी देशों में भी एक ऐसा स्थान होना चाहिए जो कि दुनिया के सभी लोगों के लिए हो ना कि हिंदुओं के लिए या फिर भारतीयों के लिए या फिर कुछ समूहों के लिए। यह पूरी दुनिया के लिए होना चाहिए। जहां पर लोग आ सकें और हिंदू परंपरा के मूल्यों को सीख सकें। यह उनकी इच्छा थी, और यह उनका संकल्प था। उनके संकल्प के अनुसार, यह अक्षरधाम पारंपरिक हिंदू मंदिर वास्तुकला के साथ बनाया गया है।
इस मंदिर के डिजाइन में एक मुख्य मंदिर, 12 छोटे मंदिर, नौ शिखर और पिरामिड शिखर शामिल हैं। अक्षरधाम में पारंपरिक पत्थर वास्तुकला का अब तक का सबसे बड़ा अण्डाकार गुंबद है। इसे एक हजार साल तक चलने के लिए डिजाइन किया गया है। इस मंदिर को चूना पत्थर, गुलाबी बलुआ पत्थर, संगमरमर और ग्रेनाइट से बनाया गया है जो कि काफी ज्यादा गर्मी और ठंडक दोनों का सामना कर सकते हैं। इन पत्थरों को दुनिया के अलग अलग कोनों से लाया गया था। बुल्गारिया और तुर्की से चूना पत्थर, ग्रीस, तुर्की और इटली से संगमरमर, भारत और चीन से ग्रेनाइट, भारत से बलुआ पत्थर और यूरोप, एशिया, लैटिन अमेरिका से दूसरे सजावटी पत्थर मंगाए गए थे।
मंदिर में बनाया गया है एक कुंड
इस मंदिर में एक कुंड भी बनाया गया है। जिसे कि ब्रह्म कुंड नाम दिया गया है। इसमें भारत की पवित्र नदियों का और अमेरिका के सभी 50 राज्यों सहित दुनिया भर के 300 से अधिक जलाशयों का पानी शामिल है। यह मंदिर पिछले कुछ दशकों में सौर पैनल फार्म, फ्लाई ऐश कंक्रीट और दुनिया भर में 20 लाख से भी ज्यादा पेड़ लगा चुका है। यह मंदिर 18 अक्टूबर से दर्शन करने के लिए खोला जाएगा।
अमेरिका के लोगों ने भी की मंदिर बनाने में सहायता
इस मंदिर को बनाने में अमेरिका के लोगों ने भी खूब बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। अमेरिका की अलबामना की एक महिला ने कहा कि यह जीवन भर का मौका था। उस महिला ने मंदिर बनाने में सहायता करने के लिए अपना काम छोड़ दिया था। यह 20 महिला स्वयंसेवकों की एक टीम का नेतृत्व कर रही है।