Bihar: रेलवे ट्रैक पर गेम खेलते वक्त दर्दनाक हादसा, ट्रेन की चपेट में आकर तीन किशोरों की हुई मौत

बिहार के बेतिया में तीन किशोर मोबाइल गेम खेलते समय ट्रेन की चपेट में आ गए और उनकी दर्दनाक मौत हो गई। कानों में इयरफोन होने से वे ट्रेन की आहट नहीं सुन सके। यह हादसा मोबाइल गेम की लत और लापरवाही के खतरनाक परिणाम को उजागर करता है, जिससे पूरे इलाके में शोक का माहौल है

अपडेटेड Jan 04, 2025 पर 12:27 PM
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पश्चिम चंपारण के बेतिया में बहुत बड़ा हादसा

बिहार के बेतिया में एक दर्दनाक हादसा हुआ है। जिसमें मोबाइल गेम की लत और लापरवाही ने तीन किशोरों की जिंदगी छीन ली। मांशा टोला रेलवे फाटक के पास ये तीन दोस्त रेलवे ट्रैक पर बैठकर मोबाइल पर गेम खेल रहे थे। कानों में इयरफोन लगाए होने के कारण उन्हें ट्रेन के करीब आने की भनक तक नहीं लगी। वे गेम में इतने खोए हुए  थे कि मौत को करीब आता भी नहीं देख पाए। तेज रफ्तार ट्रेन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।

मृतकों की उम्र 14 से 16 साल के बीच थी। इस हादसे ने न केवल परिवारों पर दुख का पहाड़ तोड़ा, बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। मोबाइल गेम की लत और असावधानी से यह हादसा एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है

गेम में मग्न, खतरे से बेखबर बच्चे


यह हादसा बेतिया-सुगौली रेल मार्ग पर मांशा टोला रेलवे फाटक के पास हुआ। तीनों किशोर, जिनकी उम्र 14 से 16 साल के बीच थी, रेलवे ट्रैक पर बैठे हुए मोबाइल गेम खेल रहे थे। कान में इयरफोन होने के कारण वे पास आती ट्रेन की आवाज नहीं सुन पाए। जब तक उन्हें खतरे का अहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

मृतकों की पहचान

इस हादसे में मृतकों की पहचान समीर आलम (बारी टोला), फुरकान आलम (मंशा टोला), और सदाब (कोडआ बेलदारी) के रूप में हुई है। हादसे की खबर सुनते ही परिवारों में कोहराम मच गया। अपने बच्चों के शव देखकर परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। पूरे इलाके में मातम का माहौल छा गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। सदर एसडीपीओ विवेक दीप ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों से मामले की जानकारी ली। हालांकि, परिजनों ने शवों का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।

इलाके में शोक का माहौल

यह हादसा मोबाइल गेम की लत और लापरवाही के गंभीर परिणाम को उजागर करता है। इस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। तीन किशोरों का जनाजा एक साथ उठने की खबर ने लोगों की आंखों को नम कर दिया। हादसा जितना दुखद है, उतना ही यह एक सीख भी है कि लापरवाही और असावधानी किस तरह से जीवन पर भारी पड़ सकती है।

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