भारतीय रेलवे को देश की लाइफ लाइन कहा जाता है। भारतीय रेलवे एशिया का सबसे बड़ा, जबकि दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने के लिए ट्रेन सबसे आसान जरिया है। इस बीच केंद्र सरकार आने वाले बजट में रेलवे में रेलवे पर खास तौर से फोकस बढ़ा सकती है। कहा जा रहा है कि पिछले साल के बजट के मुकाबले इस बार के बजट में सरकार 30 फीसदी बढ़ोतरी कर सकती है। एक मीडिया रिपोर्ट इस बार रेलवे के लिए 3 लाख करोड़ तक का आवंटन किया जा सकता है। इस आवंटन से रेलवे के पैसेंजर ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
दरअसल, भारतीय रेलवे (IR) अपने यात्री सेवा नेटवर्क को और बेहतर बनाने के लिए हमेशा काम कर रही है। रेल मंत्रालय का ध्यान अब यात्री रोलिंग स्टॉक (coaches और locomotives) के क्षेत्र में तकनीकी सुधारों पर फोकस बढ़ सकता है। बता दें कि देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में इस बजट को पेश करेंगी। इसमें रेलवे के लिए कई नई योजनाओं का ऐलान किया जा सकता है।
कोच के उत्पादन क्षमता पर फोकस
रेलवे के बजट में कोच बनाने वाली फैक्ट्रियों पर फोकस बढ़ सकता है। इसमें चेन्नई, रायबरेली, कपूरथला आदि में कोच उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के लिए तत्काल कदम उठाया जा सकता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए रेलवे ने रोलिंग स्टॉक के लिए 54,113 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 के मुकाबले 156 करोड़ रुपये अधिक है।
इस साल 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी के लिए वंदे भारत ट्रेनें चलाने की तैयारी की जा सकती है। इसके साथ ही FY25 तक 12 स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें चलाने की योजना है। इसके अलावा, इस साल के अंत तक 10-12 वंदे मेट्रो ट्रेनें भी शुरू की जा सकती हैं। अगले 5-7 साल में 250 अमृत भारत ट्रेनें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। इन ट्रेनें आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी, और इसमें सिर्फ स्लीपर और जनरल कोच होंगे। इस साल के अंत तक रेलवे 25 अमृत भारत ट्रेनें चला सकता है।
ICF कोच की जगह LHB कोच को बढ़ावा
एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में रेलवे ने अप्रैल 2018 से ICF कोच की जगह लिंक-हॉफमैन-बुश (LHB) कोचों का निर्माण शुरू किया था। एलएचबी कोच सुरक्षा और आराम के मामले में बेहतर माने जाते हैं। इनकी मांग दिनों दिन बढ़ती जा रही है। हालांकि, रेलवे 2023-24 के लक्ष्यों को पूरा करने में असफल रहा है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आगामी बजट में रेलवे इन कोचों के उत्पादन में तेजी लाई जा सकती है।