कैंसर (Cancer) एक जानलेवा बीमारी है। हालांकि इसका इलाज संभव है लेकिन फिर भी हर लाखों लोगों की मौत कैंसर के वजह से होती है। हाल ही में लैंसेंट (Lancet) की एक रिपोर्ट में कैंसर से पीड़ित महिलाओं के ऊपर एक बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सही समय पर कैंसर की पहचान करके 63 फीसदी महिलाओं को बचाया जा सकता है। वहीं ये भी कहा गया है कि समय पर इलाज मिलने पर 37 फीसदी कैंसर से होने वाली मौत को टाला जा सकता है।
बता दें कि Women, Power and Cancer टाइटल नाम से छपी इस रिपोर्ट में भारतीय महिलाओं की स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और ध्यान न देने के बारे में फोकस किया गया है। इस रिपोर्ट में मुंबई के नालासोपारा में 36 साल की एक कैंसर पीड़ित महिला का जिक्र किया गया है। जिसमें महिला को कैंसर के बारे में देरी से जानकारी मिली।
कैंसर पीड़ित महिला को सही समय पर नहीं मिला इलाज
रिपोर्ट के मुताबिक, रमा को सिर दर्द और उल्टी की शिकायत रहती थी। उसने स्थानीय डॉक्टर को दिखाया। जिसमें सलाह के आधार पर से चश्मा पहनने की सलाह दी गई। इसके लिए नेत्र विशेषज्ञ (eye specialist) के पास भेजा गया है। चश्मा लगाने के बाद भी रामा को कोई राहत नहीं मिली। बाद में पता चला कि उसके मस्तिष्क कैंसर (had brain cancer) है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रमा के पति ऑटो रिक्शा चलाते हैं और शराब का सेवन करते हैं। कैंसर के बारे में पता चलने पर उसके पति ने कहा कि अगर तुम मरती हो तो मर जाओ, जीना है तो जियो। रमा को कई तरह के शारीरिक शोषण (physical abuse) का भी सामना करना पड़ा।
50% कैंसर पीड़ित महिलाएं चिकित्सा सुविधाओं तक नहीं पहुंच पाती
Lancet की कमिश्नर डॉ. ईशू कटारिया (Dr Ishu Kataria) का कहना है कि साल 2020 में भारत में कैंसर से पीड़ित 50 फीसदी से ज्यादा महिलाओं की मौत परिवार की ओर से ध्यान नहीं देने और चिकित्सा सुविधाओं तक नहीं पहुंचने की वजह से हुई है। लैसेंट की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की तरफ से कैंसर की देखभाल पर किया जाने वाला सरकारी खर्च देश की ओर से नेशनल हेल्थ पर किया जाने वाला कुल खर्च का 2.53 फीसदी है। वहीं कैंसर की जांच के लिए जब किसी दूसरे डॉक्टर के पास रेफर किया जाता है तो पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा इंतजार करना पड़ता है।