COVID-19: क्या अभी और आने वाले हैं कोरोना के नए वेरिएंट? भारत में आएगी अब चौथी लहर? जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ
पिछले दिनों इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) कानपुर के एक ताजा अध्ययन में कहा गया था कि संभव है कि कोविड-19 महामारी की चौथी लहर 22 जून से शुरू होकर अगस्त के मध्य तक रह सकती है
MoneyControl News
अपडेटेड Mar 11, 2022 पर 3:17 PM
कोरोना महामारी शुरू होने के बाद दो साल के दौरान भारत अब तक तीन लहर झेल चुका है
कोरोना महामारी शुरू होने के बाद दो साल के दौरान भारत अब तक तीन लहर झेल चुका है। पिछले साल आई कोरोना की दूसरी लहर ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रोम की वजह से आई तीसरी लहर अब समाप्त होने की राह पर है। इस बीच देश में कोरोना के नए वेरिएंट और महामारी की चौथी लहर को लेकर भी कई तरह की आशंकाएं और अटकलें जारी हैं।
पिछले दिनों इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) कानपुर के एक ताजा अध्ययन में कहा गया था कि संभव है कि कोविड-19 महामारी की चौथी लहर 22 जून से शुरू होकर अगस्त के मध्य तक रह सकती है। आईआईटी कानपुर के शोधकर्ता एस. प्रसाद राजेश भाई, शुभ्र शंकर धर और शलभ द्वारा किए अध्ययन में कहा गया है कि संभव है कि वायरस के नए वेरिएंट का व्यापक असर होगा।
वैज्ञानिकों ने चौथी लहर की आशंका को किया खारिज
हालांकि, कई वैज्ञानिकों का कहना है कि चौथी लहर आने का पूर्वानुमान एक कयास हो सकता है। कोविड-19 के मामलों में अगले तीन महीने में एक बार फिर तेजी आने की आशंका को दूर करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में अधिकतर लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है और एक बार वे प्राकृतिक रूप से संक्रमित हो चुके हैं। इसलिए अगर लहर आती भी है तो अस्पताल में भर्ती होने और मौतों के संदर्भ में नतीजे प्रबंध करने योग्य होंगे, बशर्ते वायरस का कोई नया वेरिएंट न आ जाए।
चेन्नई स्थित गणितीय विज्ञान संस्थान (आईएमएससी) के प्रोफेसर सिताभरा सिन्हा ने कहा कि एक्टिव मरीजों की संख्या तेजी से कम हो रही है और मौजूदा स्थिति को देखकर हम निश्चित तौर पर भविष्य में नई लहर आने के बारे में नहीं कह सकते हैं। वहीं, हरियाणा स्थित अशोका विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र और जीवविज्ञान विभाग के प्रोफेसर मेनन ने पीटीआई से कहा कि मैं ऐसे किसी पूर्वानुमान पर भरोसा नहीं करता, खासतौर पर जब तारीख और समय बताया गया हो।
उन्होंने कहा कि हम भविष्य के बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं लगा सकते हैं, क्योंकि संभावित रूप से आने वाला नया वेरिएंट अज्ञात है। हम हालांकि, सतर्क रह सकते हैं और आंकड़ों को तेजी से एकत्र कर सकते हैं ताकि प्रभावी और तेजी से कार्रवाई की जा सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भ्रमर मुखर्जी ने भी इसपर सहमति जताते हुए कहा कि आईआईटी कानपुर द्वारा लगाया गया पूर्वानुमान आंकड़ा ज्योतिष है न कि आंकड़ा विज्ञान।
आने वाले हैं कोरोना के नए वेरिएंट?
कोरोना वायरस संक्रमण के नए-नए वेरिएंट की वजह से पिछले दो सालों के दौरान पूरी दुनिया में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। अब सवाल है कि क्या कोरोना के और नए वेरिएंट सामने आने वाले हैं? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने इन तमाम सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने दो ऐसे कारणों की ओर इशारा किया है जो चल रही कोविड-19 महामारी को और आगे बढ़ा सकते हैं या वायरस के अधिक नए वेरिएंट के उभरने के लिए एक "आदर्श स्थिति" को जन्म दे सकते हैं।
उन्होंने इसके लिए कोरोना वैक्सीन तक असमान पहुंच एवं कोरोना टेस्ट की कमी को प्रमुख कारण बताया। घेब्रेयियस ने कहा कि कोरोना महामारी के हाई ट्रांसमिशन यानी उच्च संक्रमण के अलावा लोगों की कोरोना के वैक्सीन एवं टेस्ट तक समान पहुंच नहीं है जिसके चलते इसके अधिक वेरिएंट के उभरने के लिए उपयुक्त वातावरण बन रहा है। उन्होंने कोविड-19 के ओमीक्रोन वेरिएंट की कम गंभीरता के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि ओमीक्रोन की प्रकृति को लेकर कई देशों में एक झूठी कथा चला रही है कि महामारी खत्म हो गई है।
घेब्रेयेसस ने कहा कि कोविड-19 संकट के कारण होने वाले अल्पकालिक आर्थिक प्रभावों से बहुत आगे इसने दुनिया को टिकाऊ विकास लक्ष्यों की ओर गंभीरता से निर्धारित किया है। WHO प्रमुख ने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य और वित्त क्षेत्रों के बीच निकट सहयोग महत्वपूर्ण है। घेब्रेयेसस ने बिना घबराहट और उपेक्षा के बीच इस साल महामारी को समाप्त करने के लिए मिलकर काम करने वाले देशों पर जोर दिया।
जानवरों से फैलेगा कोरोना वायरस!
कोरोना महामारी से लोगों के उद्योग धंधे सब चौपट हो गए और देखते ही देखते पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई। लेकिन, ऐसा लगता है कि यह संक्रमण अब जानवरों के जरिए इंसानों पर कहर ढा सकता है। कई वैज्ञानिक चिंतित हैं कि अगला कोरोना वेरिएंट मनुष्यों से नहीं, बल्कि जानवरों के जरिए फैल सकता है। अब, शोधकर्ता किसी भी नए महामारी पैदा करने वाले वायरस की पहचान करने और अगले COVID-19 वेरिएंट की पहचान करने की कोशिश करने के लिए जानवरों की निगरानी कर रहे हैं।
ABC न्यूज के हवाले से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज (NIAID) में संक्रामक रोगों की प्रयोगशाला के उप प्रमुख डॉ. जेफ टूबेनबर्गर ने कहा, "कई जानवरों की प्रजातियों में सैकड़ों-हजारों कोरोनावायरस हैं।" वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि कोरोना वायरस ने मिंक, हैम्स्टर्स को संक्रमित किया है। वहीं, उत्तरी अमेरिका में इसने जंगली सफेद पूंछ वाले हिरण को संक्रमित किया है। और जैसे-जैसे यह अधिक प्रजातियों को संक्रमित करता है, यह लगातार विकसित होता रहता है।
अब शोधकर्ता सोच रहे हैं कि क्या यह अधिक प्रजातियों में घुसपैठ कर सकता है और फिर मनुष्यों में वापस आ सकता है, संभावित रूप से नए और खतरनाक COVID वेरिएंट ला सकता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि यदि वायरस अन्य प्रजातियों को संक्रमित करने में सक्षम है, तो यह अलग तरह से विकसित होगा।