दुनिया में कोरोना वायरस का ऐसा कहर बरपा कि लोग दो साल तक अपने घरों में बंधक बनकर रह गए। महामारी से लोगों के उद्योग धंधे सब चौपट हो गए और देखते ही देखते पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गई। लेकिन, ऐसा लगता है कि यह संक्रमण अब जानवरों के जरिए इंसानों पर कहर ढा सकता है।
जी हां, कई वैज्ञानिक चिंतित हैं कि अगला कोरोना वेरिएंट मनुष्यों से नहीं, बल्कि जानवरों के जरिए फैल सकता है। अब, शोधकर्ता किसी भी नए महामारी पैदा करने वाले वायरस की पहचान करने और अगले COVID-19 वेरिएंट की पहचान करने की कोशिश करने के लिए जानवरों की निगरानी कर रहे हैं।
ABC न्यूज के हवाले से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज (NIAID) में संक्रामक रोगों की प्रयोगशाला के उप प्रमुख डॉ. जेफ टूबेनबर्गर ने कहा, "कई जानवरों की प्रजातियों में सैकड़ों-हजारों कोरोनावायरस हैं।"
वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि कोरोना वायरस ने मिंक, हैम्स्टर्स को संक्रमित किया है। वहीं, उत्तरी अमेरिका में इसने जंगली सफेद पूंछ वाले हिरण को संक्रमित किया है। और जैसे-जैसे यह अधिक प्रजातियों को संक्रमित करता है, यह लगातार विकसित होता रहता है। अब शोधकर्ता सोच रहे हैं कि क्या यह अधिक प्रजातियों में घुसपैठ कर सकता है और फिर मनुष्यों में वापस आ सकता है, संभावित रूप से नए और खतरनाक COVID वेरिएंट ला सकता है।
वैज्ञानिकों ने कहा कि यदि वायरस अन्य प्रजातियों को संक्रमित करने में सक्षम है, तो यह अलग तरह से विकसित होगा। टूबेनबर्गर ने कहा कि यह हमें एक ऐसा वेरिएंट दे सकता है जो बहुत अलग है। ऐसे संक्रमणों को रोकने के लिए विशेषज्ञ अब जानवरों के लिए एक कोरोना वैक्सीन विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
इस क्रम में दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के एक शोधकर्ता ने जानवरों के लिए एक कोरोनावायरस वैक्सीन विकसित किया है जिसका जल्द ही पालतू जानवरों पर टेस्ट किया जाएगा। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर निकोलाई पेत्रोव्स्की और पशु चिकित्सक सैम कोवाक भी जानवरों के लिए कोवैक्स-19 वैक्सीन बनाने में शामिल हैं।
पेट्रोव्स्की द्वारा विकसित, कोवैक्स-19 ईरान में लाखों लोगों को दिया गया है और ऑस्ट्रेलिया में मानव अनुमोदन का इंतजार है। कोवाक के तीन कुत्ते उन 25 पालतू जानवरों में शामिल होंगे, जो टीके के टेस्ट में भाग लेंगे।
उन्होंने शुक्रवार को न्यूज कॉर्प ऑस्ट्रेलिया को बताया कि बड़ी बात यह है कि मानव वैक्सीन तकनीक पर आधारित होने के कारण जहां 60 लाख से ज्यादा डोज सुरक्षित रूप से दिए गए हैं, हम आश्वस्त हो सकते हैं कि यह पालतू जानवरों के लिए भी बहुत सुरक्षित है।