Delhi News: दिल्ली के सरकारी स्कूलों के 30 छात्र फ्रेंच कोर्स में भाग लेने के लिए फ्रांस की राजधानी पेरिस पहुंचे हैं। भारत में संभवत यह पहली बार है जब किसी सरकारी स्कूलों में 9वीं से 12वीं में पढ़ने वाले 30 छात्र एक साथ फ्रेंच भाषा की पढ़ाई करने के लिए पेरिस गए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) का कहना है कि गरीबों के बच्चों का यह सपना पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के मार्गदर्शन में हुई शिक्षा क्रांति की वजह से साकार हुआ है। इन बच्चों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि वे इस छोटी सी उम्र में फ्रांस पढ़ने जाएंगे।
एक बयान में कहा गया है कि ये छात्र A2 लेवल के फ्रेंच कोर्स में भाग लेंगे। इसमें मेजबान परिवारों के साथ रहना और 4 से 15 नवंबर तक एफिल टॉवर और डिज्नीलैंड सहित सांस्कृतिक स्थलों का दौरा करना जैसे इमर्सिव अनुभव शामिल हैं।
बयान में आगे कहा गया है कि भारत में फ्रांसीसी दूतावास द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम दिल्ली के स्कूलों में फ्रेंच भाषा की शिक्षा को बढ़ाने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और एलायंस फ्रैंकेइस के बीच साझेदारी से उपजा है।
बयान में कहा गया है, "इस पहल का उद्देश्य छात्रों को फ्रेंच भाषा और संस्कृति की गहरी समझ प्रदान करना, उनके वैश्विक दृष्टिकोण को व्यापक बनाना और शैक्षिक अंतराल को पाटने में मदद करना है।" AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि किसी ने कभी नहीं सोचा था कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला एक गरीब परिवार का बच्चा पढ़ाई के लिए विदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि यह किसी सपने से कम नहीं है।
अरविंद केजरीवाल के बच्चों की तस्वीरों के साथ X पर लिखा, "दिल्ली सरकार के स्कूलों के 30 बच्चे आज पेरिस में हैं। फ्रेंच भाषा का एडवांस कोर्स करने। कभी किसी ने सोचा भी नहीं था कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला ग़रीब परिवार का बच्चा भी विदेश जाकर पढ़ाई करेगा। ये किसी सपने से कम नहीं है।"
AAP प्रमुख ने आगे कहा, "हमने 10 सालों में वो कर दिखाया जिसे लोग नामुमकिन कहते थे। दिल्ली के हर बच्चे को हम वो सभी मौके दे रहे हैं जो अब तक सिर्फ बड़े और अमीर परिवार के बच्चों को मिलते थे। दिल्ली की जनता के साथ मिलकर, इस क्रांति को ऐसी ऊंचाइयों तक ले जाएंगे जहां तक किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।"
इस बीच, दिल्ली सरकार ने बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन करने और बुनियादी ढांचे तथा शैक्षणिक गुणवत्ता को और बढ़ाने के लिए सरकारी विद्यालयों का नियमित तौर पर निरीक्षण करने का आदेश दिया है।
एक नवंबर को जारी किए गए आदेश के अनुसार, शिक्षा निदेशालय (डीओई) को सभी सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने का काम सौंपा गया है। इसमें उचित पेयजल, स्वच्छता, बिजली की व्यवस्था, कक्षाओं में पर्याप्त डेस्क, सही दरवाजे और खिड़कियां सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
एक परिपत्र में कहा गया है कि निरीक्षक छात्रों के अनुरूप कक्षाओं का अनुपात, अनुभागों की व्यवस्था और बाल-सुरक्षा उपायों का भी मूल्यांकन करेंगे। क्षेत्रीय शिक्षा निदेशक, जिला उपनिदेशक और उपनिदेशक (क्षेत्र) को सप्ताह में तीन दिन अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत स्कूलों और शिक्षा विभागों का निरीक्षण करना आवश्यक है।
इसमें गे कहा गया कि अधिकारियों को उसी दिन ऑनलाइन माध्यम से निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी तथा प्रत्येक दौरे के सात दिनों के भीतर निरीक्षण शाखा मुख्यालय को हार्ड कॉपी भी उपलब्ध करानी होगी जिसपर उनके हस्ताक्षर होंगे।