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Doglapan Book Review: अशनीर ग्रोवर ने कई स्याह राज से उठाया है परदा और खुद को हीरो बनाया है

Doglapan Book Review: अशनीर ग्रोवर चीजों को जिस तरह देखते हैं उससे एक कॉमिक रिलीफ मिलता है। उदाहरण के तौर पर वह कहते हैं कि उन्होंने MBA कोचिंग के लिए कैलाश कॉलोनी इसलिए चुना था क्योंकि वहां लड़कियां ज्यादा खूबसूरत थीं। और यहीं वह अपनी पत्नी माधुरी जैन से मिले।

Pratima Sharmaअपडेटेड Dec 18, 2022 पर 3:32 PM
Doglapan Book Review: अशनीर ग्रोवर ने कई स्याह राज से उठाया है परदा और खुद को हीरो बनाया है
अगर आप BharatPe की पूरी कहानी को अशनीर ग्रोवर के नजरिए से समझना चाहते हैं तो दोगलापन नाम की यह किताब पढ़ सकते हैं।

अशनीर ग्रोवर की किताब दोगलापन (Doglapan) रिलीज होने से पहले ही बेस्टसेलर बन चुकी थी। सबको इस बात का इंतजार था कि आखिरी उन्होंने अपनी किताब में क्या राज खोले हैं। अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) ने अपनी किताब में भी बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखी है। उन्होंने बिना लाग-लपेट के लिखा है, 'अगर आप अपने जीवनसाथी के साथ काम करने का फैसला करते हैं तो उन्हें को-फाउंडर्स के तौर पर बोर्ड में जगह देने में हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।' 'यह याद रखना भी बहुत जरूरी है कि निवेशक भी सिर्फ एक वेंडर की तरह है।' और उन्होंने ये भी लिख दिया है कि "मेरी राय में भारत में रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन का कॉनसेप्ट एकदम गैरवाजिब है।"

वैसे तो अशनीर ग्रोवर कभी खुदके गलत होने की बात नहीं कहते लेकिन 'दोगलापन' किताब में उन्होंने साफ तौर पर लिखा है, "रजनीश कुमार (SBI के पूर्व चेयरमैन) हायरिंग के मामले में मेरी चौथी गलती थे। इससे पहले मेरी तीन गलतियां CEO के तौर पर सुहैल समीर, CHRO के तौर पर जसनीत और GC के तौर पर सुमीत सिंह की नियुक्ति थी।" "मैंने सिकोइया को लिखा कि उन्हें इन कुत्तों को हटाना चाहिए। इसके बाद शैलेंद्र सिंह ने मिकी मल्का (Ribbit Capital) को कहा कि मेरा कद उनसे ज्यादा बड़ा हो रहा है।" ग्रोवर ने ये भी लिख दिया कि, "खुद को सबसे पहले रखो। सेकेंडरी मार्केट में जब भी मौका मिले अपनी हिस्सेदारी बेचो।"

अपनी किताब के हीरो हैं अशनीर ग्रोवर

यह समझना मुश्किल नहीं है कि अशनीर ग्रोवर ने अपनी किताब का नाम दोगलापन: द हार्ड ट्रुथ अबाउट लाइफ एंड स्टार्टअप्स (Doglapan: The Hard Truth about Life and Start-Ups) क्यों रखा है। किताब की मांग का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पब्लिश होने से पहले ही यह एमेजॉन पर बेस्टसेलर हो चुकी है। पवित्र और पॉलिटिकली करेक्ट माने जाने वाले इंडिया इंक के गलियारों के लिए अशनीर ग्रोवर का यह संस्मरण सिलेबस से बाहर का चैप्टर है। कई भारतीय आंत्रप्रेन्योर्स यहां तक कि कुछ नए जमाने वाले भी सार्वजनिक तौर पर ऐसा कुछ कहने से बचते हैं ताकि उनके शेयरहोल्डर्स-चाहे मौजूदा निवेशक हों या संभावित इनवेस्टर्स, रेगुलेटर्स हो या कस्टमर और कर्मचारी -नाराज ना हों।

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