अशनीर ग्रोवर की किताब दोगलापन (Doglapan) रिलीज होने से पहले ही बेस्टसेलर बन चुकी थी। सबको इस बात का इंतजार था कि आखिरी उन्होंने अपनी किताब में क्या राज खोले हैं। अशनीर ग्रोवर (Ashneer Grover) ने अपनी किताब में भी बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखी है। उन्होंने बिना लाग-लपेट के लिखा है, 'अगर आप अपने जीवनसाथी के साथ काम करने का फैसला करते हैं तो उन्हें को-फाउंडर्स के तौर पर बोर्ड में जगह देने में हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।' 'यह याद रखना भी बहुत जरूरी है कि निवेशक भी सिर्फ एक वेंडर की तरह है।' और उन्होंने ये भी लिख दिया है कि "मेरी राय में भारत में रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन का कॉनसेप्ट एकदम गैरवाजिब है।"
