CAG Report: जंगलों के संरक्षण के लिए रखे गए 13.86 करोड़ को आईफोन, लैपटॉप, फ्रिज और अन्य सामानों पर खर्च करने का मामला सामने आया है। इसका खुलासा केंद्रीय ऑडिटर CAG की रिपोर्ट से हुआ है। कैग ने कंपेन्सेटरी अफॉरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथॉरिटी (CAMPA) के 2019-2022 के कार्यों पर एक रिपोर्ट तैयार किया है। इसमें सामने आया है कि उत्तराखंड के जंगलों में जिन पैसों से जंगलों में पेड़ लगाना था, उन्हें 'अनाधिकृत गतिविधियों' में डायवर्ट किया गया। इन एक्टिविटीज में उत्तराखंड की हरेला स्कीम, टाइगर सफारी कार्य, बिल्डिंग्स का नवीनीकरण, सरकारी यात्राओं पर खर्च, कोर्ट केस और गैजेट्स और स्टेशनरी की खरीद शामिल हैं।
सरकार की अनुमति के बिना ₹607 करोड़ का खर्च
कैग की रिपोर्ट उत्तराखंड विधानसभा में बजट सत्र के दौरान 21 फरवरी को पेश की गई। इसमें सामने आया कि वर्ष 2017 से वर्ष 2021 के बीच वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड ने बिना सरकार की मंजूरी के 607 करोड़ रुपये खर्च कर डाले। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कैग रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि CAMPA के करीब 14 करोड़ रुपये लैपटॉप, आईफो, फ्रिज, कूलर, रिनोवेशन केस और कोर्ट केसेज पर खर्च किए गए।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत आने वाले CAMPA के निर्देशों के तहत पैसा जारी होने के एक से दो साल के भीतर पेड़ लगा दिए जाने चाहिए। हालांकि कैग की रिपोर्ट में सामने आया कि 37 मामलों में ऐसा करने में आठ साल से अधिक का समय लग गया। इसके अलावा रिपोर्ट में लगाए गए पेड़ों के कम आयु की भी बात उठाई गए। फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ने 60-65 फीसदी के सर्वाइवल रेट का मानक बनाया है लेकिन यहां वर्ष 2017-22 के लिए यह आंकड़ा सिर्फ 33 फीसदी ही रहा।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पांच डिविजन में 1,204.04 हेक्टेयर जमीन फिर से वृक्षारोपण के लायक नहीं पाई गई जिससे पता चलता है कि डीएफओ (डिविजनल वन अधिकारी)ने इनके सही होने के प्रमाण पत्र गलत जारी किए थे और जमीन की वास्तविक स्थिति का पता लगाए बिना जारी किए गए थे। डिपार्टमेंट ने इस लापरवाही के लिए संबंधित डीएफओ के खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं शुरू की। कैग की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि CAMPA के सीईओ ने फॉरेस्ट डिविजन और एजेंसियों को जुलाई 2020 से नवंबर 2021 के बीच फॉरेस्ट फोर्स के प्रमुख से जरूरी मंजूरी हासिल किए बिना ही फंड जारी कर दिए।