Generic Drugs: जेनरिक दवाएं नहीं लिखने पर डॉक्टरों के खिलाफ होगी कार्रवाई, जानिए क्या हैं NMC के नए नियम

Generic Drugs: नेशनल मेडिकल कमीशन के नए नियम बेहद सख्‍त हैं। अब डॉक्टरों को जेनरिक दवाएं लिखने की आदत डालनी होगी। ऐसा नहीं करने पर डॉक्टरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। डॉक्टरों को अब ब्रांडेड दवाओं के बजाय जोनरिक दवाएं लिखने पर फोकस बढ़ाना होगा

अपडेटेड Aug 13, 2023 पर 10:13 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
Generic Drugs: नए नियमों में कहा गया है कि हर रजिस्टर्ड डॉक्टर (Registered Medical Practitioner - RMP) को दवांए जेनेरिक नाम से और तार्किक तौर पर लिखनी चाहिए।

Generic Drugs: नेशनल मेडिकल कमीशन (National Medical Commission - NMC) के नए नियमों के मुताबिक, अब डॉक्टरों को प्रिस्क्रिप्शन में जेनेरिक दवाएं लिखनी होंगी। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। यहां तक की कुछ समय के लिए उनका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। NMC ने डॉक्टरों से ब्रांडेड दवाएं लिखने से बचने के लिए भी कहा है। नेशनल मेडिकल कमीशन 2022 में जारी नियमों के मुताबिक, डॉक्टरों को मौजूदा समय में सिर्फ जेनरिक दवाएं लिखने की जरूरत है। हालांकि इसमें दंडात्मक कार्रवाई का जिक्र नहीं किया गया था।

NMC ने 2 अगस्त को प्रोफेशनल कंडक्ट ऑफ रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर रेगुलेशन जारी किया। जिसमें बताया गया कि इंडियन मेडिकल काउंसिल की ओर से 2002 में जारी नियमों में ऐसे मामलों में सजा देने का जिक्र नहीं था।

ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले जेनरिक दवाएं हैं सस्ती


NMC की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि भारत में लोग कमाई का बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य पर खर्च कर रही है। जिसमें बड़ी राशि सिर्फ दवाओं पर खर्च की जा रही है। इसमें में आगे कहा गया है कि जेनेरिक दवांए ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 30 से 80 फीसदी सस्ती हैं। ऐसे में अगर डॉक्टर मरीजों को प्रिस्क्रिप्शन में जेनेरिक दवाएं लिखेंगे तो हेल्थ पर होने वाले खर्च में कमी आएगी। NMC ने कहा कि अस्पतालों और स्थानीय फार्मेसियों को भी जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा देने के लिए आगे आना चाहिए। मरीजों को इसके बारे में जागरूक करना चाहिए। उन्हें जन औषधि केंद्रों और अन्य जेनेरिक फार्मेसी दुकानों से दवाएं खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

डायबिटीज के मरीजों के लिए दवा से भी दमदार हैं आक के पत्ते, ऐसे करें इस्तेमाल

जानिए क्या हैं ब्रांडेड जेनरिक दवाएं

ब्रांडेड जेनेरिक दवा वह है जो पेटेंट से बाहर हो चुकी है। दवा कंपनियों की ओर से इसे बनाया जाता है। कई कंपनियों के ब्रांड नामों के तहत बेची जाती हैं। ये दवाएं ब्रांडेड पेटेंट दवाओं के मुकाबले सस्ती हो सकती हैं, लेकिन जेनेरिक वर्जन के मुकाबले महंगी होती हैं। ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं की कीमतों पर नियामक (regulatory) का नियंत्रण कम होता है।

क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं?

किसी एक बीमारी के इलाज के लिए तमाम तरह की रिसर्च और स्टडी के बाद एक रसायन तैयार किया जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे सॉल्ट कहते हैं। इस रसायन को आम लोगों को मुहैया कराने के लिए दवा का रूप दिया जाता है। आम तौर पर ऐसे रसायन बेहद महंगे होते हैं लेकिन इसे जेनेरिक नाम के सॉल्ट के कंपोजिशन और बीमारी की गंभीरता को देखते हुए तैयार किया जाता है। विशेषज्ञों की समिति और कई स्तर के परीक्षण के बाद यह तैयार होता है। इसलिए ये दवाएं अमूमन बहुत सस्ती होती हैं।

नए नियमों में कहा गया है कि हर रजिस्टर्ड डॉक्टर (Registered Medical Practitioner - RMP) को दवांए जेनेरिक नाम से और तार्किक तौर पर लिखनी चाहिए। अगर नियमों का उल्लंघन होता है तो डॉक्टरों को नियमों के बारे में अधिक सावधान रहने की चेतावनी दी जा सकती है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।