Holi 2024: होली का त्योहार देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है। मथुरा की होली का अगर नाम आता है तो यहां होली का अंदाज ही अनोखा हो जाता है। ब्रज की होली पूरी दुनिया में मशहूर है। देश विदेश से लोग यहां होली खेलने आते हैं। होली के 40 दिन पहले से ही यहां होली का उत्सव शुरू हो जाता है। ऐसे ही वृंदावन के श्री राधारमण मंदिर (Shri Radha Raman Temple, Vrindavan) की होली भी बेहद अनोखी है। यहां की लीलाएं सुनकर हैरान रह जाएंगे। एक बार यहां की होली में पहुंच गए तो फिर पूरी जिंदगी इसे नहीं भुला पाएंगे।
वृंदावन के प्राचीन राधारमण मंदिर में होली के त्योहार के 40 दिन पहले से ही होली खेलना शुरू हो जाता है। यहां भक्त जमकर होली खेलते हैं। होली के अवसर पर रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया जाता है। 29 फरवरी को ठाकुरजी की राजभोग आरती के बाद भक्त और भगवान के बीच जमकर होली हुई। सेवायत गोस्वामियों ने देश-विदेश से आए भक्तों पर प्रसादी गुलाल बरसाया और फल और मिठाई भी बांटी। यहां कई दिनों तक होली खेली जाती है।
होलिका दहन पर फूल वाली होली खेली जाती है
होली का त्योहार केवल रंगों का ही नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का भी प्रमाण है। भगवान विष्णु के प्रिय भक्त- श्री प्रह्लाद जी, भक्ति की ताकत का प्रमाण देते हैं। होलिका दहन के दिन, वृंदावन में फूल वाली होली मनाई जाती है। जुलूस के बाद शाम को होलिका दहन का समय आता है। वृंदावन की होली रंगीन पानी और गुलाल से खेली जाती है, जो फूलों और केसर जैसे जैविक पदार्थों का उपयोग करके बनाया जाता है। गोस्वामी जन- फूल, बाल्टी, रंगों के थाल, पानी की पिचकारियां, आदि का उपयोग करके, ठाकुर जी की तरफ से सभी भक्तों पर रंग छिड़कते हैं। लोग रंगों का आनंद लेते हुए धुनों पर नाचते गाते रहते हैं।
राधा रमण मंदिर में 500 साल से जल रही है अग्नि
राधा रमण मंदिर में प्रभु की लीला और चमत्कार पूरी दुनिया में मशहूर है। इस मंदिर में ठाकुर जी की मनोरम प्रतिमा स्थापित है। इस मंदिर में ठाकुर जी की मूर्ति तो एक है लेकिन उस एक मूर्ति में तीन छवि नजर आती हैं। कभी यह छवि गोविंद देव जी के समान दिखती है। राधा रमण जी के मंदिर में 500 सालों से अग्नि खुद ही जल रही है। पौराणिक कथा के अनुसार, चैतन्य महाप्रभु के शिष्य गोपाल भट्ट गोस्वामी ने अपनी भक्ति के बल पर राधा रमण जी के विग्रह रूप को प्रकट किया था। इसी अग्नि से ठाकुर जी की आरती की जाती है।