Holi 2025: कैसे पड़ा रंगों के त्योहार का नाम 'होली', नहीं जानते होंगे ये अनोखी कहानी

Holi 2025: होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्यार, अपनापन और भाईचारे का प्रतीक है। ये बुराई पर अच्छाई की जीत (होलिका दहन) और राधा-कृष्ण के प्रेम की याद दिलाती है। भारतभर में इसे अनोखे अंदाज में मनाया जाता है। मिठाइयां, संगीत, रंग और उमंग—यही है होली की असली पहचान

अपडेटेड Mar 04, 2025 पर 2:32 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
Holi 2025: क्या आप जानते हैं, होली को ‘होलिकोत्सव’ क्यों कहते हैं?

होली ये नाम सुनते ही मन में उत्साह की लहर दौड़ पड़ती है। हवा में अबीर-गुलाल की महक घुल जाती है और चारों ओर खुशियों के रंग बिखर जाते हैं। ये सिर्फ रंगों का खेल नहीं, बल्कि प्यार, अपनापन और उमंग का पर्व है, जहां दुश्मनी दोस्ती में बदल जाती है और गिले-शिकवे मिट जाते हैं। लेकिन होली का महत्व सिर्फ मस्ती तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पौराणिक कथाएँ, ऐतिहासिक परंपराएं और सामाजिक संदेश छुपे हैं। ये बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, तो कहीं भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम का रंगीन उत्सव।

भारत के हर कोने में इसे अनोखे अंदाज में मनाया जाता है, कहीं लट्ठमार होली, तो कहीं फूलों की होली।तो आइए, इस खूबसूरत त्योहार की कहानी और इसकी अनोखी परंपराओं को करीब से जानें।

कब आती है यह मस्ती भरी होली?


होली की तारीख फिक्स नहीं होती, बल्कि ये फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यानी, कभी मार्च में तो कभी फरवरी के आखिरी दिनों में। लेकिन एक बात पक्की है—होली के आते ही चारों तरफ मस्ती का रंग बिखर जाता है।

होली कथा जो इसे खास बनाती हैं

बहुत समय पहले एक अहंकारी राजा हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझने लगा था। लेकिन उसके बेटे प्रह्लाद ने उसकी बजाय भगवान विष्णु की भक्ति शुरू कर दी। ये बात राजा को नागवार गुज़री। उसने प्रह्लाद को मारने के कई जतन किए, लेकिन हर बार वो बच गया। आखिर में, हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वो प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे। होलिका को वरदान था कि आग उसे नहीं जला सकती। लेकिन विधि का विधान देखिए—भगवान विष्णु की कृपा से होलिका जलकर भस्म हो गई और प्रह्लाद बच गया। इसी की याद में हम होली से पहले होलिका दहन करते हैं, जो बुराई के अंत और अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

राधा-कृष्ण की प्रेम भरी होली

अगर होली की असली मस्ती देखनी हो, तो मथुरा और वृंदावन जाइए। कहते हैं, भगवान कृष्ण को बचपन में चिंता थी कि उनकी त्वचा सांवली क्यों है और राधा गोरी क्यों? उनकी मां यशोदा ने मजाक में कहा, “बेटा, तू भी राधा के गालों पर रंग लगा दे!” बस, उसी दिन से रंग खेलने की परंपरा शुरू हो गई।

होली के पीछे छुपा असली मतलब

होली सिर्फ गुलाल उड़ाने और भंग पीने का नाम नहीं, बल्कि इससे भी गहरी बातें इसमें छुपी हैं।

बुराई पर अच्छाई की जीत – होलिका दहन हमें सिखाता है कि चाहे कितनी भी बड़ी मुश्किलें हों, जीत आखिरकार सच्चाई की ही होती है।

प्यार और भाईचारा – ये दिन सभी गिले-शिकवे मिटाने का मौका देता है। दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं और सब एक-दूसरे को रंग लगाकर गले मिलते हैं।

नई फसल की खुशी – ये त्योहार किसानों के लिए खास होता है, क्योंकि ये नई फसल के स्वागत का समय होता है।

भारत में होली के अलग-अलग रंग

मथुरा-वृंदावन की लट्ठमार होली – बरसाना में महिलाएं लाठियों से पुरुषों को मारती हैं, और पुरुष ढाल लेकर बचने की कोशिश करते हैं।

राजस्थान की रॉयल होली – यहां राजा-महाराजा भी दरबार में रंग खेलते थे।

पंजाब का होला मोहल्ला – सिखों के लिए ये दिन युद्ध कला दिखाने और घुड़सवारी के लिए खास होता है।

केरल की मंजुल कुली होली – यहां ये त्योहार पानी के खेल और भव्य पूजा के साथ मनाया जाता है।

होली की मस्ती के बगैर कुछ अधूरा सा लगेगा

होली पर कुछ खास चीजें होती हैं, जिनके बिना ये अधूरी लगती है—

गुजिया – बिना गुजिया के होली, जैसे बिना रंग के इंद्रधनुष

ठंडाई – ठंडाई में भंग मिल गई तो समझो असली होली शुरू!

ढोल-नगाड़े – जब तक “होली है!” का शोर ना गूंजे, तब तक मज़ा ही नहीं।

रंग-बिरंगे दोस्त – कोई हरा, कोई लाल, कोई पीला—होली पर पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन कौन है।

रंगों में घुली खुशियों की मिठास

होली सिर्फ एक त्योहार नहीं, जिंदगी के हर रंग को अपनाने का पैग़ाम है। चाहे सुख हो या दुख, दोस्ती हो या दुश्मनी—होली हमें हर चीज को मिलाकर एक खूबसूरत तस्वीर बनाने की सीख देती है। इस बार, सारे गिले-शिकवे भूल जाइए और खुशियों के रंगों में सराबोर हो जाइए।

Viral Video: इंस्टाग्राम पर फॉलो करो और फ्री में पाओ सोने की कील! कानपुर में सुनार का अनोखा ऑफर, ज्वैलरी शॉप पर उमड़ी लोगों की भीड़

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।