Indian Railways: ट्रेन के डिब्बे होते हैं लाल नीले हरे, जानिए अलग-अलग रंगों के डिब्बों का क्या है मतलब

Indian Railways: ट्रेन में सफर के दौरान आपने कई रंग के कोच देखे होंगे। इसमें लाल, नीले हरे रंग शामिल है। आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर इन रंगों का क्या मतलब है। यह यात्रा करने के लिए कितना सुरक्षित हैं। कोच की डिजाइन और खासियत के आधार पर इनका रंग तय किया जाता है। रेलवे की ओर से सबसे ज्यादा नीले रंग के कोच का इस्तेमाल किया जाता है

अपडेटेड Feb 20, 2023 पर 4:49 PM
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Indian Railways: ट्रेन के डिब्बे होते हैं लाल नीले हरे, जानिए अलग-अलग रंगों के डिब्बों का क्या है मतलब

Indian Railways: भारतीय रेलवे (Indian Railway) एशिया का दूसरा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। इसे भारत की लाइफलाइन भी कहा जाता है। बहुत से लोग ट्रेन से सफर करना पसंद करते हैं। अमीर हो या गरीब, लंबी यात्रा के लिए तो हर कोई ट्रेन का सफर ही पसंद करता है। ट्रेन में यात्रा सुविधाजनक तो है ही साथ ही बस और फ्लाइट के मुकाबले सस्‍ती भी । रेल यात्रा के दौरान ट्रेनों के डिब्‍बों के रंग (Train Coaches Colour) ने आपका ध्‍यान जरूर अपनी और खींचा हो।

लेकिन क्या आपने ध्यान दिया है कि स्टेशन पर ट्रेन के कोच लाल, नीले क्यों होते हैं? इस रंग के पीछे भी कई कारण होते हैं। हर कोच के लिए अलग रंग तय होता है। कोच की डिजाइन और खासियत के आधार पर इनका रंग तय किया जाता है।

लाल रंग


ट्रेन में लाल रंग के कोच का भी इस्‍तेमाल होता है। इन्‍हें लिंक हॉफमैन (Link Hoffmann) भी कहा जाता है। यह खास तरह के कोच होते हैं। जिन्‍हें जर्मनी में तैयार किया गया है। भारतीय रेलवे ने ऐसे कोच साल 2000 में भारत में आयात क‍िए गए थे। मौजूदा समय में अब ऐसे कोच पंजाब के कपूरथला में बनाए जाते हैं। शताब्दी और राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों में ज्‍यादातर लाल रंग के डिब्‍बे लगाए जाते है। अल्युमिनियम से बने होने की वजह से दूसरे डिब्बों के मुकाबले ये काफी हल्के होते हैं। इसी वजह से इन्‍हें हाई स्‍पीड ट्रेनों में लगाया जाता है। ये कोच 160 से लेकर 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकते हैं। डिस्क ब्रेक की वजह से इमरजेंसी में इन्‍हें जल्‍द रोका जा सकता है।

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नीला रंग

सबसे कॉमन रंग की बात करें तो नीले डिब्‍बे सबसे ज्‍यादा नजर आते है। इन्हें इंटीग्रेटेड कोच कहते हैं। ऐसे कोच वाली ट्रेन की रफ्तार 70 से 140 क‍िलोमीटर प्रति घंटा होती है। ये लोहे के बने होते हैं। इनमें एयरब्रेक लगे होते हैं। लिहाजा इनका इस्‍तेमाल मेल एक्‍सप्रेस या सुपरफास्‍ट ट्रेनों में किया जाता है। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री तमिलनाडु के चेन्नई में है। इसकी स्थापना 1952 में की गई थी। ये फैक्ट्री इंडियन रेलवे के तहत काम करती है। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में हर तरह के इंटीग्रल कोच बनाए जाते है। जिनमें जनरल, एसी, स्लीपर, डेमू और मेमू कोच शामिल हैं।

हरे और भूरे रंग के कोच

हरे रंग के कोचों का इस्तेमाल गरीबरथ ट्रेनों में ज्‍यादा किया जाता है। ट्रेन के कोच में कुछ रखने के लिए रेलवे (Indian Railways) ने यह रंग ईजाद किया है। इस हरे रंग पर कई तरह की चित्रकारी भी की जाती है। जिससे यह कोच और ज्यादा सुंदर दिखाई देने लगता है। वहीं भूरे रंग के कोचों का इस्तेमाल छोटी लाइनों पर चलने वाली मीटर गेज ट्रेनों में किया जाता है।

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