मालवा एक्सप्रेस ट्रेन में जम्मू-कश्मीर से झांसी की ओर अपनी रफ्तार से जा रही थी। सबकुछ ठीक था। इस ट्रेन में मध्य प्रदेश के उमेश अहिरवार भी अपनी पत्नी और दो महीने के दुधमुंहे बच्चे के साथ सफर कर रहे थे। उमेश जम्मू के वैष्णो देवी के दर्शन करके झांसी लौट रहे थे। ट्रेन ग्वालियर के नजदीक डबरा पहुंची तो उमेश की आंख खुली। उन्होंने देखा कि मां तो सो रही है, लेकिन बच्चा गायब है। आनन-फानन में मां को भी जगा दिया। दोनों लोग बच्चे को ढूंढने लगे। लेकिन उन्हें बच्चा नहीं मिला। इसके बाद ग्वालियर GRP एफआईआर दर्ज करा दी गई।
इस मामले में हैरानी तब हुई, जब ठीक 48 घंटे बाद बच्चा उसी सीट पर सोता हुआ मिला। यह पूरी घटना 6 अप्रैल 2024 की है। छतरपुर के रहने वाले उमेश अपनी पत्नी सुखवती और 2 महीने के बच्चे के साथ सफर कर रहे थे। वो मालवा एक्सप्रेस से जम्मू-कश्मीर से झांसी की ओर आ रहे थे।
उमेश और उनकी पत्नी सुखवती ने ये मानलिया था कि उनके बेटे का अपहरण हो गया है। इस बीच इंदौर जीआरपी को एक दंपती ने दो महीने का बच्चा सौंपते हुए बताया कि मालवा एक्सप्रेस में उन्हें ऊपर की बर्थ पर यह बच्चा सोता हुआ मिला है। इंदौर जीआरपी ने ग्वालियर जीआरपी से संपर्क किया और उमेश को ग्वालियर जीआरपी ने बताया कि उनका बच्चा सुरक्षित है। अपने बच्चे के सुरक्षित मिलने की खबर पाकर उमेश और उसकी पत्नी की खुशी का ठिकाना ना रहा। उमेश अपने बच्चे को लेने के लिए इंदौर निकल गया। लेकिन इस पूरी कहानी में आखिर 48 घंटे तक बच्चा कहां गायब रहा। वो तो अपनी तरफ से ट्रेन में चढ़ भी नहीं सकता।
पुलिस ने तीन लोगों को किया गिरफ्तार
दरअसल, जिन लोगों ने पुलिस को बताया कि उन्हें बच्चा मालवा एक्सप्रेस की स्लीपर सीट में मिला है। उन लोगों के 14 साल की बेटी है। उनके बेटा नहीं है। ऐसे में उन लोगों ने बेटे को चुरा लिया और घर चले गए। पड़ोसियों ने उनसे पूछताछ शुरू कर दिया कि ये बच्चा तुम्हें कहां मिला। इससे ये लोग घबरा गए। फिर वापस इंदौर गए और बताया कि मालवा एक्सप्रेस में हमें यह बच्चा मिला है। पुलिस की कड़ाई के सामने इन लोगों ने सबकुछ सच-सच उगल दिया। पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश कर हिरासत में ले लिया। इस मामले में अमर सिंह (42), पत्नी इंदु और साली रंजना को ग्वालियर जेल भेज दिया गया है। रंजना रेलवे स्टेशन इंदौर में प्वाइंट्स मैन के पद पर काम करती है। जबकि इंदु चौहान हाउस वाइफ हैं।
5 दिन बाद माता-पिता को मिला बच्चा
वहीं बच्चा मिलने के बाद भी मां के हाथ में बच्चे को नहीं सौंपा गया। इसके लिए तमाम कागजी कार्रवाई बाकी थी। ऐसे में अपने जिगर के टुकड़े को मां रात दिन निहारती रही। लेकिन कभी हाथ नहीं लगा सकती थी। सिर्फ वो दूर से देख सकती थी। लंबी कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैसे ही मां के हाथ बच्चे को सौंपा गया तो माता-पिता के खुशी के आंसू छलक उठे।