लॉरेंस बिश्नोई एक ऐसा जाना माना गैंगेस्टर है, जो पिछले कई सालों से सलमान खान को धमकी दे रहा है। इस गैंग की एक ऐसी योजना का खुलासा हुआ, जिसे जानकर हर कोई हैरान है। सलमान खान को जान से मारने के सिलसिले में नवी मुंबई पुलिस जांच पड़ताल कर रही है। नवी मुंबई पुलिस ने लॉरेंस बिश्नी गैंग के गिरफ्तार किए गए 5 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन आरोप पत्रों में कहा गया है कि बिश्नोई गैंग ने सलमान खान को जान से मारने के लिए 25 लाख रुपये की सुपारी दी थी।
इसके साथ ही 60-70 लोगों की भर्ती की गई थी। जिनका काम सलमान के हर मूवमेंट पर नजर रखना है। पुलिस ने पांच लोगों के नाम वाली चार्जशीट में कहा कि यह ठेका जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेतृत्व वाले गिरोह ने लिया था। आरोपी पाकिस्तान से अत्याधुनिक हथियार एके 47, एके 92 और एम 16 तथा तुर्की से बने जिगाना हथियार खरीदने की तैयारी कर रहे थे।
लॉरेंस बिश्नोई की सलमान खान से है पुरानी दुश्मनी
दरअसल, लॉरेंस बिश्नोई गैंग की दुश्मनी किसी से छिपी नहीं है। कई साल से यह गैंग सलमान खान को जान से मारने की धमकी दे रहा है। यह विवाद 1998 के एक मामले से जुड़ा है। जिसमें सलमान खान काले हिरणों के अवैध शिकार में शामिल थे। बिश्नोई समुदाय के लिए एक पवित्र जानवर है। इसी वजह से लॉरेंस बिश्नोई सलमान खान से घनघोर दुश्मनी रखता है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से सलमान खान को जान से मारने की कई बार धमकी दी जा चुकी हैं। यहां तक सलमान की हत्या की योजना भी बनाई गई है।
पुलिस को जांच पड़ताल में पता चला है कि सभी शूटर सलमान खान के मुंबई के घर, पनवेल का फॉर्म हाउस और गोरेगांव के फिल्म सिटी पर सलमान खान की हर मूवमेंट की खबर रख रहे थे। पुलिस ने चार्जशीट में ये भी बताया कि सलमान खान को मारने के लिए आरोपियों ने 18 साल से कम उम्र के लड़कों को हायर किया था।
कन्याकुमारी में होना था इकट्ठा
मुंबई पुलिस के मुताबिक सभी शूटर्स गोल्डी बरार और अनमोल बिश्नोई के ऑर्डर का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही उन्हें ऑर्डर मिलता वे सभी पाकिस्तान से आए अत्याधुनिक हथियार का इस्तेमाल कर सलमान खान पर हमला कर देते। यह सभी शूटर पुणे रायगढ़ नवी मुंबई ठाणे और गुजरात में छिपे हुए हैं। आरोपियों ने सलमान खान पर फायरिंग करने के बाद खुद का स्किप प्लान भी बनाया था। जिसके मुताबिक सलमान खान को मारने के बाद सभी को कन्याकुमारी इकट्ठा होने के कहा गया। उसके बाद बोट से सभी को श्रीलंका ले जाया जाता और फिर श्रीलंका से उन सभी को जिस देश में जाना होता वहां पर उन्हें ले जाया जाता। ताकि भारतीय जांच एजेंसी उन तक पहुंच न सके।