Lilavati Hospital Flags Big Scam: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में स्थित मशहूर लीलावती अस्पताल का संचालन करने वाले वर्तमान ट्रस्टियों ने आरोप लगाया है कि उसके पूर्व ट्रस्टियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों ने 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का गबन किया है। लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट (LKMM) ने इस संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और बांद्रा पुलिस थाना में अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि अस्पताल परिसर में पूर्व ट्रस्टियों और संबंधित व्यक्तियों द्वारा काला जादू भी किया गया था।
शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि लीलावती अस्पताल के फाइनेंशियल रिकॉर्ड के 'फोरेंसिक ऑडिट' के दौरान उजागर हुई इस हेराफेरी ने ट्रस्ट के संचालन और बांद्रा क्षेत्र में स्थित प्रमुख निजी मेडिकल सुविधा द्वारा प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया है।
लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट के परमानेंट रेजीडेंट ट्रस्टी प्रशांत मेहता ने पत्रकारों से कहा, "हमने शिकायतें दर्ज कराई और बांद्रा मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के कारण यह FIR में तब्दील की गईं। पूर्व न्यासियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ तीन से अधिक FIR दर्ज की गई हैं। इन व्यक्तियों के खिलाफ चौथी कार्यवाही अब मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित है, जो काले जादू और गुप्त प्रथाओं के लिए बांद्रा पुलिस थाना में दर्ज हमारी शिकायत पर आधारित है।"
बांद्रा मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट के निर्देश पर बांद्रा पुलिस ने 6 मार्च को LKMM के 14 पूर्व ट्रस्टियों और तीन प्राइवेट कंपनियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में मामला दर्ज किया। उन्होंने बताया कि बांद्रा मजिस्ट्रेट अदालत ने इन्हीं व्यक्तियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।
अस्पताल परिसर में किए जाने वाले काले जादू के अनुष्ठानों के बारे में मेहता ने कहा, "हमे मानव बाल और खोपड़ियों वाले सात से अधिक कलश मिले हैं।" ट्रस्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी पत्र लिखकर मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है। ट्रस्ट ने PMLA के तहत जांच करने की अपील की है।
पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय को दी गई शिकायत में लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट ने आरोप लगाया है कि फंड की कमी के कारण हर दिन हजारों मरीजों को दी जाने वाली सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
NDTV के मुताबिक, लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में की गई कुल हेराफेरी की राशि करीब 2,100 करोड़ रुपये है। पहली एफआईआर जुलाई 2024 में दर्ज की गई थी। लेकिन गबन के आरोप 2001 से ही लगे हुए हैं। अस्पताल ने धनराशि वापस पाने के लिए अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है।