Long Covid: दुनिया भर में कोरोना वायरस महामारी का कोहराम मचा हुआ है। कोरोना वायरस महामारी ने पूरी दुनिया में लोगों को झकझोर कर रख दिया है। मौजूदा समय में भले ही कोरोना का कहर कम हुआ हो। लेकिन लोगों के शरीर में कॉम्प्लिकेशंस (complications) बने हुए हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक कोरोना संक्रमित होने पर मरीजों में हार्ट अटैक (heart attacks) और ब्रेन स्ट्रोक (Brain strokes) का खतरा बढ़ जाता है। यानी कोरोना के बाद भी मस्तिष्क और ह्रदय में समस्याएं हो सकती हैं।
हार्ट और ब्रेन से जुड़े 60% मामले बढ़े
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ. अशोक सेठ (Dr Ashok Seth, Chairman, Fortis Escorts Heart Institute) का कहना है कि एक स्टडी से पता चला है कि कि हार्ट और ब्रेन से जुड़ी समस्याओं में 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। डॉ. सेठ ने कहा, पश्चिमी देशों से ढेर सारा डेटा सामने आया है। इसमें करीब एक साल में हजारों लोगों पर स्टडी की गई है। इस स्टडी के मुताबिक, समान अवधि में सामान्य आबादी के मुकाबले हार्ट अटैक या स्ट्रोक की घटनाएं 60 फीसदी बढ़े हैं। ऐसे में साफ तौर पर पता चलता है कि कोविडा भले ही हल्का हो लेकिन लंबे समय तक रहने पर लोगों पर असर पड़ सकता है। इससे लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
हल्के लक्षणों वाले रोगियों को हार्ट अटैक का खतरा
कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा अभी तक टला नहीं है। सेठ ने कहा कि कोरोना संक्रमण का शिकार होते ही फेफड़ों पर असर पड़ता है। लेकिन जिन मरीजों में कोरोना वायरस के हल्के लक्षण सामने आए हैं। उन्हें हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोरोना वायरस के लक्षण दिखते ही उसे नजर अंदाज न करें। डॉक्टरों से जांच कराना बेहद जरूरी है।
इससे बचने के लिए सबसे पहला कदम यही है कि कोविड संक्रमित मरीजों को हल्के लक्षण होने पर भी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। भले ही कोविड से ठीक हो गए हैं। इसका मतलब ये हुआ कि अगर सीने में दर्द होता है। बेचैनी या धड़कन महसूस होती है। ऐसे में तुरंत चेकअप कराने की जरूरत है। डॉ. सेठ ने इस बारे में जोर देकर कहा कि मरीजों को पहले से मौजूद बीमारियों वाले रोगियों को अपने हार्ट की फंक्सनिंग (functioning) की जांच करानी चाहिए।