MahaKumbh 2025 Mela: कब से शुरू होगा महाकुंभ मेला? जानें शाही स्नान की तिथियां

Maha Kumbh 2025 Prayagraj: साल 2025 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेला लगने वाला है। इसके लिए योगी सरकार ने बड़े पैमाने पर तैयारी शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार 40 करोड़ से ज्यादा लोग स्नान करने आएंगे। हर 12 साल बाद महाकुंभ का आयोजन किया जाता है। पिछली बार साल 2013 में महाकुंभ का आयोजन किया गया था

अपडेटेड Nov 12, 2024 पर 2:49 PM
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Maha Kumbh 2025 Prayagraj: साल 2025 में महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी 2025 को पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व से होगी

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हर 12 साल बाद महाकुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा यहां 3 साल में कुंभ मेले और 6 साल में अर्धकुंभ का आयोजन किया जाता है। साल 2013 के बाद अब अगले महाकुंभ का आयोजन साल 2025 में होगा। इसकी शुरुआत 13 जनवरी 2025 को पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व से होगी। समापन 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि पर खत्म होगा। महाकुंभ 45 दिनों तक चलता है। हिंदू धर्म में कुंभ मेले को बहुत ही खास माना जाता है। कुंभ की भव्यता और मान्यता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं, कि कुंभ में स्नान करने के लिए लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। इसका आयोजन सिर्फ प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में ही होता है।

सनातन धर्म में विश्वास करने वालों के लिए ये सबसे बड़ा उत्सव होता है। जिसमें दुनियाभर के साधु-संत इस मेले में आते हैं। इसके साथ ही लोगों का हुजूम इस पवित्र मेले में शामिल होता है। महाकुंभ का नजारा ऐसा होता है, मानो दुनिया भर के लोग इस मेले में आ गए हों। महाकुंभ के इस पावन महासंगम में हर कोई डुबकी लगाने की इच्छा रखता है। इसलिए इसे महासंगम भी कहा जाता है।

कुंभ पर्व 2025 शाही स्नान तिथियां


महाकुंभ की शुरुआत पौष पूर्णिमा स्नान के साथ होती है। यह 13 जनवरी 2025 को है। वहीं महाशिवरात्रि के दिन 26 फरवरी 2024 को अंतिम स्नान के साथ कुंभ पर्व का समापन होगा। इस दौरान शाही स्नान की तिथियां कुछ इस तरह हैं।

14 जनवरी 2025 - मकर संक्रांति

29 जनवरी 2025 - मौनी अमावस्या

3 फरवरी 2025 - बसंत पंचमी

12 फरवरी 2025 - माघी पूर्णिमा

26 फरवरी 2025 – महाशिवरात्रि

महाकुंभ का मेला कब कहां लगता है?

महाकुंभ 2025 का आयोजन 4 जगहों पर किया जाता है।

हरिद्वार

हरिद्वार में कुंभ मेले का आयोजन तब किया जाता है। जब सूर्य मेष राशि और बृहस्पति कुंभ राशि में विराजमान होते हैं।

प्रयागराज

प्रयागराज में महाकुंभ मेला तब लगता है, जब सूर्य मकर राशि में होता है।

नासिक

नासिक में महाकुंभ मेले को तब आयोजित किया जाता है। जब सूर्य और बृहस्पति राशि में होते हैं।

उज्जैन

उज्जैन में महाकुंभ तब आयोजित किया जाता है, जब बृहस्पति सिंह राशि में और सूर्य मेष राशि में होता है।

क्यों लगता है महाकुंभ?

दरअसल, महाकुंभ की पौराणिक कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार, जब एक बार राक्षसों और देवताओं के बीच समुद्र मंथन हुआ। तब इस दौरान मंथन से निकले सभी रत्नों को आपस में बांटने का फैसला हुआ। सभी रत्न को राक्षसों और देवताओं ने आपसी सहमति से बांट लिए, लेकिन इस दौरान निकले अमृत के लिए दोनों पक्षों के बीच युद्ध छिड़ गया।

ऐसे में असुरों से अमृत को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अमृत का पात्र अपने वाहन गरुड़ को दे दिया। असुरों ने जब देखा कि अमृत गरुड़ के पास है, तो वह इसे छीनने की कोशिश करने लगे। इस छीना-झपटी में अमृत की कुछ बूंदें धरती की चार जगहों पर यानी प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरी। जहां-जहां यह बूंदे गिरी थी आज वहीं पर कुंभ मेले का आयोजन होता है।

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