Maharashtra-Karnataka dispute: फिर उठा दशकों पुराना विवाद, मराठी न बोलने पर कंडक्टर को पीटा, बेलगावी में बढ़ा तनाव

Maharashtra-Karnataka dispute: बेलगावी में कन्नड़ और मराठी भाषाई विवाद फिर भड़क गया जब एक बस कंडक्टर पर मराठी में बात न करने के आरोप में हमला हुआ। इस घटना के बाद कर्नाटक-महाराष्ट्र के बीच बस सेवाएं रोक दी गईं। यह विवाद 1956 से जारी है और 2004 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। हालिया राजनीतिक घोषणाओं ने भी तनाव बढ़ा दिया

अपडेटेड Feb 26, 2025 पर 1:31 PM
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Maharashtra-Karnataka dispute: बेलगावी में फिर सुलगा भाषाई विवाद

बेलगावी में कन्नड़ और मराठी भाषाओं का पुराना विवाद एक बार फिर भड़क उठा जब कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की बस के कंडक्टर और ड्राइवर पर हमला कर दिया गया। आरोप था कि कंडक्टर ने यात्री से मराठी में बात करने से इनकार कर दिया, जिससे नाराज भीड़ ने हिंसा कर दी। मामला यहीं नहीं रुका—कंडक्टर के खिलाफ भी बदसलूकी की शिकायत दर्ज कर दी गई, जिससे विवाद और उलझ गया। इस घटना के बाद कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच बस सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हुई।

बेलगावी, जो पहले भी कन्नड़-मराठी संघर्ष का केंद्र रहा है, एक बार फिर भाषा की लड़ाई में झुलसने लगा। जहां एक ओर राज्य सरकारें शांति बनाए रखने की अपील कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में बढ़ता तनाव एक बड़े टकराव का संकेत दे रहा है।

बस सेवाएं निलंबित


इस बढ़ते विवाद के कारण कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच बस सेवाओं को रोक दिया गया। दोनों राज्यों के परिवहन निगमों ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और अपील

कर्नाटक के परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने महाराष्ट्र सरकार पर आरोप लगाया कि वो हमलावरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही। वहीं, गृह मंत्री जी परमेश्वर ने दोनों राज्यों से शांति बनाए रखने की अपील की। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार पर बेलगावी के कन्नड़ भाषियों को सुरक्षा देने में विफल रहने का आरोप लगाया।

बेलगावी विवाद का इतिहास

ये विवाद 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के दौरान शुरू हुआ। पहले बेलगाम (अब बेलगावी) जिला बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा था। महाराष्ट्र ने दावा किया कि यहां की मराठी भाषी आबादी के कारण इसे महाराष्ट्र में शामिल किया जाना चाहिए, लेकिन इसे कर्नाटक में मिला दिया गया।

महाजन आयोग की सिफारिशें और विवाद

1966 में महाजन आयोग ने सिफारिश की कि बेलगावी और उसके आसपास के 247 गांव कर्नाटक में रहें, जबकि 264 गांवों को महाराष्ट्र में शामिल किया जाए। महाराष्ट्र सरकार ने इस रिपोर्ट को पक्षपाती बताते हुए खारिज कर दिया।

कानूनी लड़ाई और वर्तमान स्थिति

2004 में महाराष्ट्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जो अब तक लंबित है। 2022 में महाराष्ट्र विधानसभा ने फिर से बेलगावी को महाराष्ट्र में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया। जवाब में कर्नाटक ने बेलगावी में विधानमंडल सत्र आयोजित करके अपना दावा मजबूत किया।

राजनीतिक तनाव और हालिया घटनाएं

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बेलगावी के मराठी भाषियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की, तो कर्नाटक के उस समय के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने महाराष्ट्र में कन्नड़ स्कूलों को आर्थिक मदद देने की घोषणा की। इससे दोनों राज्यों के बीच विवाद और बढ़ गया।

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